भारत की हरित ऊर्जा में बड़ी छलांग: BPCL-सेम्बकॉर्प के संयुक्त उपक्रम ‘NeuEN’ को मिला नुमालीगढ़ रिफाइनरी से 10,000 टन ग्रीन हाइड्रोजन का अनुबंध

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नई दिल्ली : भारत के ऊर्जा क्षेत्र में डी-कार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, न्युईन ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (NeuEN) ने नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस अनुबंध के तहत, NeuEN प्रति वर्ष 10,000 टन (10 KTPA) ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगा।

NeuEN, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और सेम्बकॉर्प ग्रीन हाइड्रोजन इंडिया के बीच 50:50 की हिस्सेदारी वाला एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है।


परियोजना की मुख्य बातें और भविष्य का रोडमैप:

  • उत्पादन संयंत्र: NeuEN असम स्थित NRL की रिफाइनरी के भीतर ही एक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र विकसित करेगा।
  • संचालन तिथि: इस परियोजना के 2028 तक वाणिज्यिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है।
  • तकनीक: रिफाइनरी को 24×7 स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए इसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को उन्नत स्टोरेज (भंडारण) समाधानों के साथ जोड़ा जाएगा।
  • ऐतिहासिक टैरिफ: यह परियोजना प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से हासिल की गई है, जो ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती है।

नेतृत्व का दृष्टिकोण:

संजय खन्ना (चेयरमैन एवं एमडी, BPCL):

“यह परियोजना BPCL की भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा पोर्टफोलियो के निर्माण की यात्रा में एक मील का पत्थर है। हम इसके माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन वैल्यू चेन में अपनी उपस्थिति को सशक्त कर रहे हैं और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

विपुल तुली (सीईओ, हाइड्रोजन व्यवसाय, सेम्बकॉर्प):

“यह ऐतिहासिक टैरिफ दर्शाता है कि सुव्यवस्थित दीर्घकालिक ऑफटेक अनुबंध कितने महत्वपूर्ण हैं। हमें NRL के डी-कार्बोनाइजेशन लक्ष्यों में सहयोग करने और भारत की ग्रीन हाइड्रोजन महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने पर गर्व है।”


साझेदारी की ताकत:

  • BPCL: घरेलू बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति और बुनियादी ढांचा क्षमताओं का लाभ इस प्रोजेक्ट को देगा।
  • सेम्बकॉर्प: भारत में 7.6 गीगावॉट के विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो के साथ, सेम्बकॉर्प बड़े पैमाने पर और लागत-प्रतिस्पर्धी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सुनिश्चित करने में सक्षम है।

निष्कर्ष: औद्योगिक डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में बढ़ते कदम

यह अनुबंध न केवल नुमालीगढ़ रिफाइनरी के कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा, बल्कि भारत के ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ को भी नई गति प्रदान करेगा। रिफाइनिंग जैसे भारी उद्योगों में ग्रीन हाइड्रोजन का एकीकरण भविष्य में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का एक प्रभावी मार्ग प्रशस्त करेगा।

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