मंडी : देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी ने आज अपना 17वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर संस्थान ने न केवल अपनी पिछली उपलब्धियों का जश्न मनाया, बल्कि रणनीतिक अवसंरचना विस्तार के लिए ₹700 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की घोषणा करते हुए भविष्य का रोडमैप भी पेश किया।
समारोह में ‘इंटेलिजेंस रिवोल्यूशन’ और भविष्य की तकनीकों पर चर्चा करने के लिए उद्योग जगत और वैश्विक शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं।
प्रमुख अतिथि और उनका विज़न
- मुख्य अतिथि: इंफोसिस के सह-संस्थापक और पद्म भूषण श्री क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि आने वाले 25-30 वर्ष भारत के लिए वैश्विक नवाचार का नेतृत्व करने का सुनहरा अवसर हैं। उन्होंने आईआईटी मंडी को भारत को ‘प्रोडक्ट नेशन’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
- विशिष्ट अतिथि: स्टैनफोर्ड रोबोटिक्स लैब (USA) के निदेशक प्रो. उस्सामा खातिब ने संस्थान के वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें सिलिकॉन वैली के समकक्ष वैश्विक नवाचार केंद्र बनने की अपार क्षमता है।
निदेशक का संबोधन: ‘षोडश’ से आत्मनिर्भरता की ओर
संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“आईआईटी मंडी अब क्वांटम टेक्नोलॉजी, एआई और सेमीकंडक्टर सिस्टम्स में एक अग्रणी शोध केंद्र बन चुका है। पिछले तीन वर्षों में हमने ₹120 करोड़ से अधिक के शोध प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। हमारा फोकस ‘फ्यूचर-रेडी लीडर्स’ तैयार करना है जो तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे।”
शोध और नवाचार की बड़ी उपलब्धियां
संस्थान ने अपनी शोध यात्रा के कुछ प्रभावशाली आंकड़े साझा किए:
- शोध अनुदान: पिछले 3 वर्षों में 177 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹120 करोड़ का फंड प्राप्त हुआ।
- कंसल्टेंसी: ₹17 करोड़ मूल्य के 200 से अधिक कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स का सफल निष्पादन।
- विशेषज्ञता: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटेरियल्स में अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास।
- उद्यमिता: इन्क्यूबेशन प्रोग्राम्स के माध्यम से स्टार्टअप्स और ‘डीप टेक’ नवाचार को निरंतर बढ़ावा।
सम्मान और भविष्य की राह
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शोध, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों और संकाय सदस्यों को सम्मानित किया गया। संस्थान ने स्पष्ट किया कि उसका अगला लक्ष्य इंटरडिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग और वैश्विक सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करना है। ₹700 करोड़ के नए निवेश से परिसर में विश्वस्तरीय शोध प्रयोगशालाओं और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा।
