बुरहानपुर। बुरहानपुर में द्वितिय वर्ष 27 जुलाई 2026 सोमवार को बालाजी मंदिर महाजनापेठ से विशाल एवं भव्य भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा दोपहर 2 बजे निकाली जाएगी।
यह रथयात्रा नगर के विभिन्न मार्गो से होते हुवे शनवारा वाडी पहुचकर रथयात्रा का कथा,आरती एवं महाप्रसादी के साथ समापन होगा। इस रथयात्रा में लेझिम खेलतम अखाडे, घोडेे, बग्गी, कीर्तनकारों के साथ संतजन एवं नगरवासी भारी संख्या में शामील होंगें। आयोजक संस्था इस्कॉन के बुरहानपुर ,हरदा प्रभारी श्री हिमान्शु टाले ने उपरोक्त जानकारी देते हुवे समस्त नगर वासीयों से इस रथयात्रा में शामील होने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य भगवद्गीता और वेदों के ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाना तथा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रचार करना है।
21 फीट ऊॅचा हाईड्रोलीक रथ :- उन्होने बताया कि इस रथयात्रा में उत्तरभारत के 6 राज्यों के क्षेत्रिय सचिव एवं इंदौर इस्कॉन प्रमुख महामना महाराज श्री , युक्रेन से पधारे इस्कॉन प्रमुख तथा 20 अन्य प्रमुखजन भी इस रथयात्रा में शामील होगें। इस रथयात्रा के लिए 21 फीट ऊॅचा हाईड्रोलीक रथ बुरहानपुर पहुच रहा है। रथयात्रा के श्ुाभारम्भ पर एवं समापन स्थल पर छप्पनभोग का आयोजन किया गया। रथयात्रा के पिछे केसरीया भात का वितरण होगा,वही रथ से केला प्रसादी वितरीत होती रहेगी। समापन स्थल पर भगवान श्री जगन्नाथ कथा,आरती एवं महाप्रसादी का भी आयोजन रहेगा।
इन स्थानो से निकलेगी रथयात्रा:- यह भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जुलाई 2026 सोमवार को दोपहर 2.00 बजे से बडे बालाजी मंदिर महाजनापेठ से प्रारम्भ होगी। श्री जगनाथ रथ यात्रा मार्ग बालाजी मंदिर महाजनापेठ से पांडुमल चौराहा , गांधी चौक, फव्वारा चौक , शनि मंदिर , भाईसाहब की हवेली , पांडुमल चौराहा , राजपुरा गेट , न्यामतपुरा ,बड़े पोस्ट ऑफिस , जयस्तंभ से शनवारा होते हुवे गुजराती वाड़ी शनवारा सेवा सदन कॉलेज के सामने समापन कथा,आरती एवं महाप्रसादी के सााथ होगा।
इस्कॉन का इतिहास:- श्री हिमान्शु टाले ने बताया कि भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद ने 70 साल की उम्र में इस संस्था की नींव रखी थी। इस्कॉन का मुख्य आध्यात्मिक और प्रशासनिक केंद्र मायापुर, पश्चिम बंगाल में स्थित है। वैष्णव परंपरा अनुसार यह गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा है, जहाँ श्रीकृष्ण को सर्वोच्च भगवान माना जाता है। देशभर में आज भारत समेत दुनिया भर में इस्कॉन के 800 से अधिक मंदिर, स्कूल और सामुदायिक केंद्र हैं। प्रसिद्ध मंदिर भारत में वृंदावन,कृष्ण.बलराम मंदिर, दिल्ली,मायापुर, बेंगलुरु और मुंबई के इस्कॉन मंदिर बहुत प्रसिद्ध हैं। यहाँ भारतीय संस्कृति और ,, हरे कृष्ण हरे राम,,महामंत्र का जाप मुख्य रूप से किया जाता है। 12 दिवसीय यह उत्सव का सेामवार को समापन अवसर है। इस दिवस प्रभु श्री जगननाथ वापसी मंदिर में विराजमान होते है।
समरसता का प्रमुख आयोजन:- आपने बताया कि वर्ग,जाति और सम्प्रदाय से मुक्त समरसता के पावन पर्व श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास प्राचिन है। और यह स्कन्द पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण जैसे ग्रंथो में मिलता है। पूरी ;उड़ीसा में हर वर्ष आषाढ़ मास की द्वितिया को निलाद्री उत्सव के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। इसके पीछे माता सुभद्रा, राजा इंद्र घुम्न से जुडी पौराणिक और एतिहासिक कथाओं का वर्णन है।
रथ पर आरुढ भगवान जगन्नाथ की सेवा में समाजजन रथ को रस्सी से खींचते है साथ ही भक्त यात्रा मार्ग पर रथ के आगे झाडु लगाते हुए छे रतरहा रस्म को आज भी जिवित रखे हुए है। कहा जाता है ,, रथे तू वामनं दुष्टा पुनर्जन्म न विद्यते ,,जो व्यक्ति रथ पर आरुढ भगवान जगन्नाथ के दर्शन करता है वह इस दु:खमय संसार में पुन: जन्म नहीं लेता । तो आइये! प्रभु जगन्नाथ,बलदेव एवं सुभद्रा जी के दिव्य रध के साथ भक्ति और आनंदमय यत्रा से जुड़ें। 27 जुलाई 2026 , सोमवार को दोपहर 2 बजे , बडे बालाजी मंदिर महाजनापेठ बुरहानपुर से प्रारंभ होकर शनवारा वाडी पहुचेगी।
