ग्वालियर निवासी सुधा दुबे द्वारा दायर इस याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे और अदालती निर्देश इस प्रकार हैं:
याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्तियां और दलीलें
स्थायी रोजगार बनाम नकद वितरण: याचिकाकर्ता के अनुसार, हर महीने करीब ₹1,800–₹1,900 करोड़ सीधे बांटने के बजाय सरकार को महिलाओं के लिए स्वरोजगार, उद्योग और कौशल विकास के स्थायी साधन तैयार करने चाहिए।
वित्तीय स्थिति व कर्ज पर भार: राज्य पर पहले से भारी कर्ज होने के बावजूद इतनी बड़ी राशि नकद अंतरण (Direct Benefit Transfer) पर खर्च करने से सरकारी खजाने पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है।
चुनावी राजनीति का सवाल: याचिका में योजना की शुरुआत के समय (मार्च 2023 के चुनावी माहौल) पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया गया कि करदाताओं के पैसे का उपयोग चुनावी लाभ या लोकलुभावन वादों के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर होना चाहिए।
योजना का वर्तमान स्वरूप और सरकार काह तर्क
सशक्तीकरण व आर्थिक स्वावलंबन: सरकार का आधिकारिक पक्ष रहा है कि यह योजना महिलाओं को घरेलू फैसलों में स्वतंत्र बनाने, पोषण और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से लाई गई है।
लाभार्थियों की संख्या व राशि: योजना के अंतर्गत लगभग 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं को यह राशि उनके खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जा रही है।
हाईकोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने मुख्य सचिव, वित्त विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर योजना के लाभार्थियों की वास्तविक संख्या, अब तक खर्च की गई कुल राशि और वित्तीय प्रभाव का आधिकारिक ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा है।
कोई रोक नहीं: हाईकोर्ट ने योजना के संचालन या मासिक किस्तों के भुगतान पर किसी भी प्र�
