- भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र सिंह पटेल इस समय अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में हैं। भाजपा के इस वरिष्ठ नेता ने अपरोक्ष रूप से देश की महिलाओं को बच्चे पैदा करने वाली मशीन और युवाओं-युवतियों को नशेड़ी ठहरा दिया है। पहले बयान में उन्होंने ‘हम दो-हमारे पांच’ का नारा देते हुए कहा कि प्रत्येक हिंदू को कम से कम पांच बच्चे पैदा करना चाहिए। नेता जी को इससे कोई मतलब नहीं कि संबंधित परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है? इतने बच्चे पालने की उसकी क्षमता है भी या नहीं? सबसे महत्चपूर्ण महिलाएं इसे बारे में क्या सोचती हैं, वे बच्चे पैदा करने की मशीन तो नहीं, कि आपने कहा और वे पैदा करने लगें। डिलेवरी के दौरान होने वाली उनकी पीड़ा का अहसास शायद सांसद जी को नहीं है। मुंह उठाया और कुछ भी बिना सोचे समझे बोल दिया। दूसरा, उन्होंने कह दिया कि डीजे पर नाचने वाले 90 फीसदी युवा और युवतियां नशे में होते हैं। वे यहीं नही रुके, उन्होंने कहा कि डांस करने वाली ये युवतियां कम से कम 4-5 घंटे तक नशे में रहती हैं। सच यह है कि शादी-विवाह और अन्य पािरवारिक, धार्मिक उत्सवों में डांस करने वाले सभी नशेड़ी नहीं होते। वे खुशी में नाचते-गाते हैं लेकिन गजेंद्र पटेल ने तो इसकी परिभाषा ही बदल दी। ताज्जुब की बात यह है कि भाजपा नेतृत्व ने इस नेता से अब तक जवाब-तलब तक नहीं किया।
0 सियासत से कैसे दूर रह पाएगी दिग्विजय की पदयात्रा….? - दिग्विजय सिंह ने जब उज्जैन से अयोध्या तक पद यात्रा की घोषणा की थी तभी ऐलान कर दिया था कि उनकी यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक रहेगी। इस दौरान राजनीति को लेकर कोई बात नहीं होगी। इसके साथ उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली थी। यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति जनजागरण तथा धार्मिक स्थलों में चंदे, चढ़ावे, निर्माण कार्यों और मंदिरों की संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग बताया गया है। पदयात्रा 20 अक्टूबर को दशहरा से प्रारंभ होगी लेकिन इससे पहले यात्रा को लेकर दिग्विजय के जैसे बयान आए हैं, उन्हें देखकर सवाल पैदा होता है कि यह सियासत से कैसे दूर रह पाएगी? वे सभी को आमंत्रित करने की बात कह रहे हैं, लेकिन जो मुद्दे वे उठा रहे हैं उन्हें देखते हुए इंडिया गठबंधन से जुड़े लोग तो यात्रा से जुड़ सकते हैं, लेकिन भाजपा, संघ या एनडीए से जुड़े दल नहीं। दिग्विजय यात्रा के संबंध में बात करते हुए भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वीर सावरकर और हिंदुत्व पर अटैक करते हैं। वे मानते हैं कि राम मंदिर चढ़ावे में चोरी से भाजपा और संघ ने अपने कार्यालय बनाए हैं। उनका यह भी कहना है कि हिंदू कोई धर्म नहीं है। सनातन धर्म को हिंदुत्व की राजनीति ने बदनाम किया है। यात्रा प्रारंभ होने से पहले ही जब दिग्विजय के ऐसे विचार हैं तो यह यात्रा गैर राजनीतिक कैसे हो सकती है?
0 ओबीसी आरक्षण पर कोर्ट के फैसले से बढ़ा सियासी पारा…. - अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले से प्रदेश में सियासी रार छिड़ गई है। हाईकोर्ट ने प्रदेश में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने से संबंधित सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं और 13 फीसदी होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को नियुक्तियां देने का आदेश दिया है। भाजपा पर कांग्रेस इसलिए भारी पड़ रही है क्योंकि कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में 2019 से ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण लागू किया था। अब प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार है तब यह आरक्षण खत्म हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने अच्छे वकील नहीं किए और कोर्ट में ओबीसी का पक्ष अच्छी तरह नहीं रखा। इसकी वजह से पिछड़ा वर्ग का हक छिन गया। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की नीयत में ही खोट है। इसके विपरीत भाजपा का आरोप है कि कमलनाथ सरकार के 2019 के अध्यादेश और संशोधन कानून में तैयारी की कमी तथा कुछ ड्राफ्टिंग संबंधी त्रुटियां थीं। राजनीतिक लाभ लेने के लिए इसे आनन-फानन में लागू कर दिया गया था। यही कारण है कि हाईकोर्ट की दहलीज में जाकर यह कानून दम तोड़ गया। दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। हालांकि चूंकि कांग्रेस सरकार ने 27 फीसदी आरक्षण दिया था और भाजपा सरकार में यह रद्द हो गया। इसलिए भाजपा सरकार बैकफुट पर है।
0 पीठाधीश्वर शास्त्री का विवादों से ‘चोली-दामन’ जैसा साथ….! - बंुदेलखंड में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विवादों से ‘चोली-दामन’ जैसा साथ हो गया है। एक शांत नहीं हो पाता, दूसरा सामने आ जाता है। इसकी वजह जो भी हो, लेकिन धीरेंद्र शास्त्री विवादों के कारण चर्चा और आलोचना के केंद्र में तो हैं। इनका ताजा विवाद धाम आने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए बयान से जुड़ा है। उन्होंने कथा मंच से कह दिया कि महिलाएं और बेटियां बागेश्वर धाम अकेली न आएं और सेवादारों पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। इस टिप्पणी पर कई धर्मगुरुओं तक ने सवाल उठाए हैं। साध्वी हर्षानंद रिछारिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं आश्रमों, धामों में सुरक्षित नहीं तो कहां हैं? एक अन्य संत अनिलानंद ने कहा कि यह बयान सनातन परंपरा और निष्ठा से दायित्व निभा रहे सेवादारों का अपमान है। सच भी है जब आप अपने सेवादारों की गारंटी नहीं ले सकते और धाम पहुंचने वाली महिलाएं ही असुरक्षित हैं। फिर बड़ा सवाल है कि आप धाम के पीठाधीश्वर बने ही क्यों? इससे पहले शास्त्री नागपुर की अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति की चुनौती, कलचुरी समाज के भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन पर बयान, छत्रपति शिवाजी महाराज और संत तुकाराम से जुड़े बयान, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और मांसाहार पर टिप्पणी, भाई शालिग्राम गर्ग के आचरण और जमीनी विवादों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं।
0 सिर-फुटौव्वल पर भाजपा-कांग्रेस में यह बड़ा फर्क….! - आपसी सिर-फुटौव्वल और अंदरूनी कलह के मामले में भाजपा-कांग्रेस की लगभग एक जैसी स्थिति है। दोनों जगह नेताओं के बीच आपस में तलवारें खिंची होने की खबरें सुर्खियां बनी रहती हैं। दोनों दलों में बड़ा फर्क ऐसे विवादों से निबटने को लेकर है। ताजे दो विवादों से इस फर्क को समझा जा सकता है। पहला, धार जिले के धरमपुरी से भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर ने अपने ही दल की केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर पर कुछ आरोप लगाते हुए उनके निवास के सामने भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया। मामला प्रदेश भाजपा नेतृत्व के पास पहुंचा। विधायक को नोटिस जारी कर भोपाल तलब किया गया और प्रदेश कार्यालय पहुंचते ही उन्होंने माफी मांग कर मामले को समाप्त कर दिया। दूसरा, विवाद कांग्रेस के अंदर हुआ। चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ अकील और प्रदेश महासचिव अमित शर्मा के बीच गाड़ी में बैठने को लेकर विवाद हो गया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में दोनों नेताओं के बीच गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। पर विवाद को कांग्रेस नेतृत्व ने कैसे निबटाया, किसी को नहीं मालूम। विवादों को शांत करने के मामले में कांग्रेस को भाजपा से सीखना चाहिए।
