विधायक की शह पर मंडल अध्यक्ष की उगाही? टीटी नगर बना चंदा वसूली सेंटर!

Spread the love

पार्क की जमीन पर जिम, सवालों के घेरे में निगम और स्मार्ट सिटी

भोपाल। राजधानी भोपाल में स्मार्ट सिटी के नाम पर विकास की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। हरियाली बचाने, नागरिक सुविधाएं बढ़ाने और सार्वजनिक संसाधनों को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन टीटी नगर क्षेत्र से सामने आया एक मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वार्ड क्रमांक 31 और जोन क्रमांक 7 में पार्क के लिए आरक्षित भूमि पर कथित रूप से जिम निर्माण कराए जाने के आरोपों ने न केवल नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल मरण ने मुख्य सचिव, नगर निगम आयुक्त और स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में लगाए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं तो यह केवल एक अवैध निर्माण का मामला नहीं होगा, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर उदाहरण माना जाएगा।

शिकायत के अनुसार भाजपा मंडल अध्यक्ष पारस नरवरिया द्वारा पूर्व में नगर निगम के सामुदायिक भवन स्थित प्लॉट नंबर 86 में कई वर्षों तक जिम संचालित किया जाता रहा। आरोप यह भी है कि जिम का उपयोग करने वाले लोगों से प्रति व्यक्ति लगभग 250 रुपये शुल्क लिया जाता था। सवाल यह उठता है कि यदि यह भवन नगर निगम की संपत्ति था तो वहां निजी रूप से शुल्क वसूली की अनुमति किसने दी? यदि शुल्क लिया गया तो उसकी राशि किस खाते में जमा हुई? क्या नगर निगम को इसका कोई राजस्व प्राप्त हुआ या फिर पूरी व्यवस्था निजी लाभ के लिए संचालित की जाती रही?

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक जिम संचालित होने के बावजूद कभी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उसकी वैधानिक स्थिति क्या है। यदि वह निगम की अनुमति से चल रहा था तो अनुमति संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? और यदि अनुमति नहीं थी तो फिर इतने लंबे समय तक प्रशासन की आंखें बंद क्यों रहीं?

मामला तब और दिलचस्प हो जाता है जब शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत प्लॉट नंबर 86 की बिक्री होने के बाद सामुदायिक भवन खाली कराया गया। इसके बाद जिम को कथित रूप से प्लॉट नंबर 91 पर स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह भूमि पार्क के लिए आरक्षित है और यहां किसी प्रकार का स्थायी निर्माण नियमों के विपरीत है।

यदि वास्तव में पार्क की जमीन पर जिम बनाया जा रहा है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि नागरिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है। शहरों में पार्क और खुले मैदान नागरिकों की सामूहिक संपत्ति होते हैं। बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के टहलने और पर्यावरण संरक्षण के लिए इनका विशेष महत्व होता है। ऐसे में यदि पार्क की जमीन पर निर्माण कार्य किया जाता है तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि टीटी नगर क्षेत्र में पहले भी कई सार्वजनिक स्थलों का स्वरूप बदलने की कोशिशें होती रही हैं। कभी पार्किंग के नाम पर, कभी सामुदायिक गतिविधियों के नाम पर और कभी विकास परियोजनाओं के नाम पर सार्वजनिक जमीनों का उपयोग बदला जाता रहा है। ऐसे में यह नया विवाद लोगों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि जमीन पार्क के लिए आरक्षित है तो वहां निर्माण की अनुमति किस स्तर पर दी गई? क्या नगर निगम ने इसकी मंजूरी दी? क्या स्मार्ट सिटी प्रशासन ने कोई प्रस्ताव पारित किया? क्या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति प्राप्त की गई? या फिर राजनीतिक प्रभाव के चलते नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया?

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में स्मार्ट सिटी, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी संदिग्ध बताया है। हालांकि अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन शिकायत ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के इस प्रकार का निर्माण संभव नहीं होता। यही कारण है कि मामले में विधायक स्तर तक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

टीटी नगर लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां होने वाले किसी भी निर्माण कार्य पर आमतौर पर प्रशासन की नजर रहती है। ऐसे में यदि पार्क की जमीन पर वास्तव में निर्माण हो रहा है तो यह मानना कठिन है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी न हो। यही कारण है कि लोग अब केवल निर्माण करने वालों पर ही नहीं, बल्कि निगरानी और अनुमति देने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठा रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण ने स्मार्ट सिटी परियोजना की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्मार्ट सिटी का उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है, न कि सार्वजनिक संपत्तियों को विवादों में घेरना। यदि परियोजना के नाम पर पार्क जैसी सार्वजनिक भूमि का स्वरूप बदला जाता है तो इससे नागरिकों का भरोसा कमजोर होता है।

निर्मल मरण ने मांग की है कि पार्क की जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि पूर्व में संचालित जिम से प्राप्त आय का ऑडिट कराया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि वर्षों तक वसूला गया शुल्क किस खाते में जमा हुआ।

फिलहाल नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रबंधन और आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन शिकायत के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन शिकायत को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।

क्योंकि सवाल केवल एक जिम का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें सार्वजनिक जमीनों का उपयोग कौन और किस अधिकार से तय करता है। यदि पार्क की जमीन पर निर्माण को वैध ठहराया जाता है तो कल किसी और पार्क, मैदान या सार्वजनिक स्थल पर भी ऐसा ही प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल टीटी नगर ही नहीं, बल्कि पूरे भोपाल के नागरिक हित में आवश्यक है।

admin1

admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *