मुंबई : भारत में सुरक्षित ऋण (Secured Credit) के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की नवीनतम ‘गोल्ड लोन लैंडस्केप रिपोर्ट’ के अनुसार, गोल्ड लोन अब बैलेंस शेयर के मामले में देश का दूसरा सबसे बड़ा रिटेल क्रेडिट उत्पाद बन गया है। दिसंबर 2025 तक भारत के कुल रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 11.1% हो गई है, जो मार्च 2022 में मात्र 5.9% थी।
बाजार के मुख्य आंकड़े:
- लोन वितरण में उछाल: 2022 की पहली तिमाही के मुकाबले लोन वितरण मूल्य (Value) में 5.1 गुना की वृद्धि हुई है।
- औसत लोन राशि: प्रति खाता औसत गोल्ड लोन बैलेंस 1.1 लाख रुपये से बढ़कर 1.9 लाख रुपये हो गया है। वहीं, नए लोन वितरण की औसत राशि 1.96 लाख रुपये तक पहुँच गई है।
- संस्थानों की हिस्सेदारी: सरकारी बैंकों (PSBs) की हिस्सेदारी 57% से बढ़कर 62% हो गई है, जबकि एनबीएफसी (NBFCs) की हिस्सेदारी भी बढ़कर 11% हो गई है।
उधारकर्ताओं की बदलती प्रोफाइल: रिपोर्ट में एक दिलचस्प बदलाव यह देखा गया है कि अब ‘प्राइम’ और उससे बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले मजबूत उधारकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है। गोल्ड लोन लेने वालों में उच्च क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी अब 52% है। इसके अलावा, महिला उधारकर्ताओं की भागीदारी 36% से बढ़कर 39% हो गई है, जिसका विस्तार दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी तेजी से हो रहा है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ, श्री भावेश जैन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा:
“गोल्ड लोन अब केवल आपातकालीन नकदी की जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घरेलू उधारी व्यवहार का एक मुख्य हिस्सा बन गया है। यह अब एक संगठित और सुलभ वित्तीय माध्यम के रूप में उभर रहा है, जिसे मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहक भी पसंद कर रहे हैं।”
जोखिम और सावधानी: तेजी से बढ़ते इस क्षेत्र में रिपोर्ट ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। अध्ययन के अनुसार, 2.5 लाख रुपये से अधिक के बड़े लोन वाले खातों में चूक (Delinquency) की दर 1.5% देखी गई, जो छोटे लोन की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऋणदाताओं को केवल गिरवी रखे सोने (Collateral) पर भरोसा करने के बजाय उधारकर्ता की कुल चुकाने की क्षमता और उसके क्रेडिट व्यवहार का भी समग्र मूल्यांकन करना चाहिए।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि गोल्ड लोन अब भारतीय ऋण बाजार में एक ‘अंतिम विकल्प’ के बजाय ‘पहली पसंद’ की ओर बढ़ रहा है।
