पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई), भोपाल में बुधवार को दो अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। पहला कार्यक्रम हिंदी कार्यशाला के अंतर्गत ‘हिंदी—राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य’ विषय पर व्याख्यान शृंखला के रूप में आयोजित हुआ| दूसरा कार्यक्रम 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुर्वेद के महत्व, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और स्वस्थ जीवनशैली पर केंद्रित रहा।
डॉ. सुधीर शर्मा ने भाषा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने हिंदी की भाषाई परंपरा, देवनागरी लिपि तथा आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय भाषाओं के विकास की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके माध्यम से ज्ञान के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल ने कहा कि हिंदी के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने दैनिक जीवन और कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने, सीआरपी में हिंदी में कार्य शुरू करने तथा हिंदी में लेखन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया तथा हिंदी में कार्य करने की क्षमता को पहचानकर उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार पाठक ने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार हिंदी माह के अंतर्गत हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों एवं पत्राचार में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार करने पर जोर दिया।
11वें आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेद के महत्व पर विशेष व्याख्यान:
इसी दिन आयोजित दूसरे कार्यक्रम में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर डॉ. मांडवी शर्मा ने आयुर्वेद के महत्व, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति तथा स्वस्थ जीवनशैली पर व्याख्यान दिया। डॉ. मांडवी शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन बनाए रखने की समग्र पद्धति है। उन्होंने ‘षड्रस आहार’— मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त और कषाय के महत्व को समझाते हुए संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों कार्यक्रमों में संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।
