पहले दिन भारत के गुणवत्ता व नवाचार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक उद्योग जगत के नेता एक साथ आए; उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए IFQM और कार्लसरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर
नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता की एक मजबूत संस्कृति द्वारा समर्थित होना चाहिए। यह मुख्य संदेश नई दिल्ली में आईएफक्यूएम (IFQM) सिम्पोजियम 2026 के तीसरे संस्करण के पहले दिन के विचार-विमर्श में उभरकर सामने आया। वरिष्ठ उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं, वैश्विक गुणवत्ता विशेषज्ञों, सीईओ (CEOs), सीएक्सओ (CXOs) और शिक्षाविदों को एक साथ लाते हुए, इस सिम्पोजियम में यह पता लगाया गया कि भारत globally प्रतिस्पर्धी संस्थानों और उद्यमों को बनाने के लिए अपने पैमाने, तकनीक और मानव पूंजी का लाभ कैसे उठा सकता है।
“पावरिंग विकसित भारत – स्केल विदाउट बाउंड्रीज टू एडवांस डेवलपमेंट थ्रू टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन एंड इंक्लूसिव कनेक्टिविटी” विषय पर मुख्य भाषण देते हुए केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि जल्द ही दुनिया गुणवत्ता, नवाचार और आत्मनिर्भरता के बारे में सीखने के लिए भारत की ओर देखेगी। उन्होंने ‘विकसित भारत@2047’ की दिशा में भारत को आगे ले जाने और ‘आत्मनिर्भरता’ की यात्रा को मजबूत करने में आईएफक्यूएम (IFQM) जैसी पहलों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
भारत के प्रमुख उद्यमों के एक कंसोर्टियम द्वारा स्थापित IFQM, एक उद्योग-नेत्रित्व वाला आंदोलन है जो भारतीय संगठनों को गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और निर्यात-सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फाउंडेशन विकसित भारत के राष्ट्र-प्रथम उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्ता, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों के माध्यम से एमएसएमई (MSMEs) सहित भारतीय उद्योग की क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है।
सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष श्री एन. चंद्रशेखरन ने टिकाऊ, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और संस्थानों के निर्माण में भारत की प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भारत ने टिकाऊ विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और संस्थानों के विकास में जबरदस्त प्रगति की है। हमारी अर्थव्यवस्था बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है और पिछले कुछ वर्षों में यह उम्मीदों से बेहतर रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच इसे हासिल करना कोई आसान काम नहीं था। यह बुनियादी ढांचे के विकास, विनिर्माण (विशेष रूप से सटीक विनिर्माण) और मानव प्रक्रिया (शिक्षा और कौशल विकास) में निवेश के कारण संभव हुआ है।”
अपने उद्घाटन भाषण में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने संगठनों में गुणवत्ता को एक संस्कृति बनाने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, “इन्फ्रास्ट्रक्चर में गुणवत्ता के साथ काम करना बेहद महत्वपूर्ण है। हम अभी तक उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं; वैश्विक प्रथाओं से बहुत कुछ सीखना बाकी है। उम्मीद है कि IFQM जैसी पहल हमें उत्कृष्टता के उस स्तर तक पहुँचने में मदद करेगी। व्यक्तिगत रूप से, मैं कई उदाहरण साझा कर सकता हूँ, और प्रत्येक उदाहरण उन पाठों में योगदान देता है जिनकी हमें गुणवत्ता प्राप्त करने की आवश्यकता है। हर कर्मचारी को इसमें शामिल होना होगा। यह सिर्फ गुणवत्ता के बारे में नहीं है; यह नवाचार के बारे में है। गुणवत्ता को एक संस्कृति बनना होगा; मुझे लगता है कि इससे यह संभव होगा।”
गुणवत्ता और गवर्नेंस में उत्कृष्टता को सम्मान
पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता अकादमी (IAQ) द्वारा IFQM के अध्यक्ष श्री वेणु श्रीनिवासन को ‘मार्कोस ई. जे. बर्टिन क्वालिटी इन गवर्नेंस मेडल’ से सम्मानित करना रहा, जो गुणवत्ता सिद्धांतों और तरीकों के माध्यम से सुशासन को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को मान्यता देता है। यह सम्मान IAQ के ट्रस्टी श्री सुनील सिन्हा और IAQ के अध्यक्ष श्री राउल मोल्टेनी द्वारा प्रदान किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए IAQ के अध्यक्ष श्री राउल मोल्टेनी ने पारंपरिक गुणवत्ता प्रबंधन से आगे बढ़कर “मानवता के लिए गुणवत्ता” (Quality for Humanity) की ओर बढ़ने के IAQ के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और इस एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय कंपनियों ने साबित कर दिया है कि टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट (TQM) को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है और यह एक व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है। श्री सिन्हा ने उन नेताओं को पहचानने के महत्व पर बल दिया जिन्होंने संगठनों के प्रबंधन और संचालन के तरीके में गुणवत्ता को शामिल किया है।
टीवीएस मोटर कंपनी (TVS Motor Company) की गुणवत्ता यात्रा पर विचार करते हुए श्री वेणु श्रीनिवासन ने याद किया कि कैसे तीन दशक से भी अधिक समय पहले जापानी गुणवत्ता विशेषज्ञों ने TQM पर कंपनी के फोकस को मजबूत करने में मदद की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डेमिंग पुरस्कार को मंजिल नहीं, बल्कि किसी संगठन की TQM यात्रा की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा प्रक्रियाओं और अभ्यासों से आगे बढ़कर हितधारकों के साथ विश्वास कायम करने तक फैली हुई है, जो अच्छे शासन (गुड गवर्नेंस) के साथ आने वाली जिम्मेदारी को उजागर करती है।
उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए IFQM और कार्लसरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) का हाथ मिलाना
ज्ञान, अनुसंधान और क्षमता निर्माण पर अपने ध्यान को और मजबूत करते हुए, IFQM और कार्लसरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) ने सिम्पोजियम में एक समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से एक नए सहयोग को औपचारिक रूप दिया।
टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस श्री वेणु श्रीनिवासन की उपस्थिति में आईएफक्यूएम के सीईओ और निदेशक श्री सौमित्र भट्टाचार्य ने कार्लसरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रो. डॉ.-इंजी. गिजेल लांजा के साथ समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।
यह साझेदारी गुणवत्ता और नवाचार में सहयोग को मजबूत करेगी और इन सिद्धांतों को उद्योग को चलाने वाली प्रणालियों और प्रक्रियाओं में गहराई से शामिल करने की एक साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। यह साझेदारी भारतीय उद्योग की उभरती जरूरतों के साथ अकादमिक अनुसंधान और विशेषज्ञता को जोड़ते हुए उद्योग-अकादमिक सहयोग पर IFQM के फोकस को भी आगे बढ़ाएगी।
विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्ता पर चर्चा
पहले दिन छह पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों और अवसरों का परीक्षण करने और यह प्रदर्शित करने के लिए उद्योग जगत के नेताओं और एमएसएमई (MSMEs) को एक साथ लाया कि गुणवत्ता और नवाचार कैसे मापने योग्य प्रभाव पैदा कर सकते हैं:
- फार्मा और लाइफ साइंसेज: जेनेरिक्स से आगे बढ़ना – अभिनव दवाओं में वैश्विक नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करना।
- पैमाने से उत्कृष्टता तक: भारत के वैश्विक नेतृत्व के लिए बुनियादी ढांचे की पुनर्कल्पना।
- फोर्स मल्टीप्लाई के रूप में IFQM: विभिन्न क्षेत्रों में मापने योग्य प्रभाव।
- विनम्र शुरुआत से वैश्विक मानक: द फोर्स मल्टीप्लायर प्लेबुक।
- भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब में बदलना।
इन सत्रों में IFQM पहल से लाभान्वित होने वाले एमएसएमई के अनुभवों को भी उजागर किया गया, जिससे यह प्रदर्शित हुआ कि गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और नवाचार में केंद्रित हस्तक्षेप व्यवसायों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और वैश्विक मानकों की ओर बढ़ने में कैसे मदद कर सकते हैं।
पहले दिन भारत की विकसित भारत की महत्वाकांक्षा, गुणवत्ता और नवाचार, प्रौद्योगिकी-संचालित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की खोज करने वाले पांच मुख्य भाषण भी शामिल थे, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की बदलती भूमिका पर दृष्टिकोण भी शामिल थे।
एक विशेष सीईओ सत्र, “क्रिएटिंग फोर्स मल्टिप्लायर्स फॉर द इंडस्ट्री-लेड मूवमेंट – बोर्डरूम विजन टू शॉप फ्लोर एक्सीलेंस”, वरिष्ठ व्यावसायिक नेताओं को उन अभ्यासों और संगठनात्मक हस्तक्षेपों की जांच करने के लिए एक साथ लाया जो बोर्डरूम के दृष्टिकोण को शॉप फ्लोर पर उत्कृष्टता में अनुवादित कर सकते हैं। सत्र इस बात पर केंद्रित था कि कैसे नेतृत्व प्रतिबद्धता, कर्मचारी भागीदारी, गुणवत्ता संस्कृति और नवाचार मिलकर संगठनों में टिकाऊ और मापने योग्य प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
सरकार, उद्योग, शिक्षाविद, वैश्विक गुणवत्ता संस्थानों और एमएसएमई के दृष्टिकोण को एक साथ लाते हुए, IFQM सिम्पोजियम 2026 के पहले दिन ने भारत को ‘पैमाने से उत्कृष्टता’ (Scale to Excellence) की ओर बढ़ने और व्यक्तिगत संगठनात्मक पहलों से गुणवत्ता व नवाचार के लिए एक व्यापक, उद्योग-नेतृत्व वाले आंदोलन की आवश्यकता को दोहराया।
