मुंबई : कर बचत और निवेश प्रबंधन को और अधिक सुलभ बनाते हुए इंडसइंड बैंक ने आज आधिकारिक तौर पर कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS) की शुरुआत की है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से अनुमति प्राप्त करने के बाद, बैंक अब आयकर अधिनियम, 1961 के तहत पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को पुनर्निवेश (Reinvestment) तक सुरक्षित रखने के लिए जमा स्वीकार करेगा।
यह योजना उन ग्राहकों के लिए एक बड़ा सहारा है जिन्होंने हाल ही में अपनी संपत्ति बेची है और पुनर्निवेश के लिए सही अवसर की तलाश में हैं।
टैक्स छूट और सुरक्षा का तालमेल
अक्सर संपत्ति बेचने के बाद प्राप्त राशि पर भारी टैक्स देनदारी बनती है। इंडसइंड बैंक की यह स्कीम ग्राहकों को निम्नलिखित संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि जमा करने की सुविधा देती है:
- पात्र संपत्तियां: आवासीय घर, फ्लैट, फार्महाउस, कृषि भूमि, शहरी भूमि और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की भूमि।
- मुख्य लाभ: निर्धारित वैधानिक समय-सीमा के भीतर इस खाते में पैसा जमा करने पर ग्राहक आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कर छूट (Tax Exemption) का लाभ उठा सकते हैं।
खातों के प्रकार: बचत और निवेश की स्वतंत्रता
इंडसइंड बैंक इस योजना के तहत दो तरह के विकल्प प्रदान कर रहा है, ताकि ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव कर सकें:
- टाइप A – सेविंग्स अकाउंट: यह उन लोगों के लिए है जिन्हें जमा और निकासी में लचीलापन चाहिए। इसमें कोई न्यूनतम शेष राशि (Minimum Balance) की आवश्यकता नहीं है और बचत खाते की दर से ब्याज मिलता है।
- टाइप B – टर्म डिपॉजिट (FD): यह उन निवेशकों के लिए है जो एक निश्चित अवधि के लिए पैसा सुरक्षित रखना चाहते हैं। इसे ₹10,000 की न्यूनतम राशि के साथ शुरू किया जा सकता है और इसमें पुनर्निवेश की अवधि के अनुसार अधिक रिटर्न मिलता है।
पात्रता और उपलब्धता
यह योजना इंडसइंड बैंक की सभी अधिकृत गैर-ग्रामीण (Non-rural) शाखाओं में उपलब्ध है। इसके लिए पात्र ग्राहकों की श्रेणी में शामिल हैं:
- निवासी व्यक्ति (Residents) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF)।
- गैर-व्यक्तिगत संस्थाएं (Non-individual entities)।
- अनिवासी भारतीय (NRI)।
निष्कर्ष: वित्तीय योजना के लिए ‘बफर टाइम’
इंडसइंड बैंक की यह पहल निवेशकों को जल्दबाजी में गलत निवेश निर्णय लेने से बचाती है। अब ग्राहक अपना पैसा बैंक में सुरक्षित रखकर शांति से अगले निवेश (जैसे नया घर खरीदना या निर्माण कराना) की योजना बना सकते हैं, जबकि उनका पैसा टैक्स के दायरे से बाहर और सुरक्षित रहेगा।
