भोपाल : कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) ने भोपाल के आरसीवीपी नोरोन्हा एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी में दो दिवसीय ‘जन शिक्षण संस्थान (JSS) जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ का सफल आयोजन किया। इस वर्कशॉप में देश भर के 143 जन शिक्षण संस्थानों सहित ट्राइफेड (TRIFED), निस्बड (NIESBUD) और बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जेएसएस योजना की प्रगति की समीक्षा करना और इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों व डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना था।
मंत्रालय की सचिव श्रीमती देवश्री मुखर्जी ने जेएसएस मॉडल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समावेश का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 2018-19 से अब तक इस योजना के माध्यम से 34 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें 83 प्रतिशत महिलाएं हैं। वर्तमान में यह योजना देश के 294 संस्थानों के माध्यम से वंचित वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों को 51 विभिन्न जॉब रोल्स में कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
कॉन्फ्रेंस की मुख्य विशेषताएं और डिजिटल सुधार
- डिजिटल एकीकरण: अब जेएसएस के तहत नामांकन से लेकर प्रमाणन तक की पूरी प्रक्रिया स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर आधार-आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ जोड़ दी गई है। इससे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
- लाइव लाइवलीहुड सेल: एसआईडीएच (SIDH) पर एक नया मॉड्यूल शुरू किया गया है, जो प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों के रोजगार, स्वरोजगार, ऋण प्राप्ति और आय पर पड़ने वाले प्रभाव की वास्तविक समय (Live) ट्रैकिंग करेगा।
- बाजार और क्रेडिट लिंकेज: वर्कशॉप में अमेज़न सहेली जैसे पार्टनर्स के साथ ई-कॉमर्स, उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग मानकों पर चर्चा हुई। साथ ही, लाभार्थियों को बैंकों से जोड़कर ‘क्रेडिट लिंकेज’ मजबूत करने पर जोर दिया गया।
- स्थानीय नवाचार: कार्यक्रम के दौरान जेएसएस उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय स्तर पर विकसित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।
कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी के मार्गदर्शन में, मंत्रालय जेएसएस मॉडल को ‘लास्ट-माइल स्किलिंग’ (अंतिम छोर तक कौशल) के रूप में सुदृढ़ कर रहा है। प्रत्येक जिले में लगभग 30-35 सब-सेंटर के माध्यम से घर-घर जाकर दी जाने वाली यह ट्रेनिंग ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। इस भोपाल वर्कशॉप के निष्कर्षों से आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के क्रियान्वयन को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
