मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार द्वारा अंतरराज्यीय बस संचालन के लिए अपनाए जा रहे नए मॉडल को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद जैन कासलीवाल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर इसे नया परिवहन मॉडल बता रही है, लेकिन दूसरी ओर मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम की लगभग ₹500–550 करोड़ की सरकारी संपत्तियों और बस स्टैंडों का उपयोग निजी बड़ी कंपनियों को बस संचालन के लिए देने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार टाटा, आयशर, वोल्वो, रैपिडो और हिंदूजा जैसी बड़ी निजी कंपनियों को राज्य के बस स्टैंडों से बस संचालन की अनुमति देने की प्रक्रिया की जा रही है और इसकी शुरुआत 23 सितंबर से प्रस्तावित है।
आनंद जैन कासलीवाल ने कहा कि सवाल यह है कि जब बसें निजी कंपनियों की होंगी, स्टाफ निजी कंपनियों का होगा और संचालन भी निजी कंपनियां करेंगी, तो सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल के बदले मध्य प्रदेश की जनता को क्या मिलेगा? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस पूरे मॉडल में सरकार का नियंत्रण किस स्तर पर रहेगा और आम यात्रियों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां निजी कंपनियों को संचालन के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि:
- क्या आम जनता को बस किराए में कोई राहत मिलेगी?
- क्या सरकार निजी कंपनियों द्वारा निर्धारित किराए और अन्य शुल्क पर नियंत्रण रखेगी?
- सरकारी संपत्ति के उपयोग के बदले सरकार को कितना राजस्व प्राप्त होगा?
- इन संपत्तियों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी है या नहीं?
- निजी कंपनियों के संचालन के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा, सुविधाओं और शिकायतों के लिए सरकार की जवाबदेही क्या होगी?
- मध्य प्रदेश के स्थानीय और छोटे बस ऑपरेटरों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है?
कासलीवाल ने आरोप लगाया कि इस पूरी योजना में सरकारी संपत्तियों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की आशंका दिखाई देती है और यदि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही तो भ्रष्टाचार की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी योजना, संपत्तियों की सूची, कंपनियों के साथ किए जाने वाले समझौते, किराया निर्धारण की व्यवस्था तथा सरकार को होने वाली आय का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाए।
मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम को लेकर भी सरकार स्थिति स्पष्ट करे
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के बंद करने का गजट नोटिफिकेशन को लेकर भी अभी सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया है है। सरकार को बताना चाहिए कि राज्य परिवहन निगम के भविष्य को लेकर उसकी नीति क्या है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में ही मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम को बंद किया गया था। अब यदि सरकारी परिवहन व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के बजाय सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल निजी बड़ी कंपनियों के लिए किया जाता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि मध्य प्रदेश के स्थानीय बस ऑपरेटरों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का भविष्य क्या होगा?
आनंद जैन कासलीवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकारी संपत्ति का उपयोग निजी कंपनियों के लिए किया जा रहा है तो सबसे पहली प्राथमिकता आम जनता का हित होना चाहिए। सरकार यह सुनिश्चित करे कि निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के बजाय यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सस्ती परिवहन सुविधा मिले।
उन्होंने कहा कि सरकार को सरकारी संपत्तियों को निजी क्षेत्र के संचालन के लिए देने से पहले विधानसभा, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के सामने पूरी योजना की जानकारी रखनी चाहिए। यदि जनता को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है और सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल निजी कंपनियों के व्यावसायिक हितों के लिए होने जा रहा है, तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।
