रिलीजन धर्म नही है, धर्म रिलीजन से ऊपर है, यदि रिलीजन धर्म के अनुसार चलता है तो मनुष्य को मुक्ति दिलाते है, जब रिलीजन धर्म को छोड़कर चलते है तो साम्प्रदायिक कलह होते है, धर्म के नाम पर अत्याचार होते है,
पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हमे तकलीफ देने वालों को उनके संकट समय में मदद की है, क्योंकि हमारे डीएनए में धर्म है यह धर्म हमें चलाएगा,
दुनिया के संघर्षों में हम बीच में नहीं पड़े, हमने सबको जोड़ने का प्रयास किया है।
उज्जैन में तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का आयोजन चल रहा है । यह आयोजन देवास रोड स्थित गीता भवन में हो रहा है। यहां देशभर से करीब 1700 विद्यार्थी पहुँचे है। युवा धर्म संसद के दूसरे दिन सर संघचालक मोहन भागवत ने अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने धर्म, पर्यावरण, युवाओं के आचरण और पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम लिए बिना भारत के प्रति उसके रवैये का उल्लेख किया। भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन और आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं का जीवन ऐसा होना चाहिए, जिससे पूरा विश्व प्रेरणा ले।
आज दूसरे दिन युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन हुआ । कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, संरक्षक-सेवाज्ञ संस्थानम्, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलगुरु-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और आशीष कुमार आशु, अध्यक्ष-सेवाज्ञ संस्थानम् शामिल हुए ।
सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि
- सृष्टि के अस्तित्व से धर्म है सृष्टि विलय तक चलेगा, धर्म सभी सुख का कारण है।
- रिलीजन धर्म नही है, धर्म रिलीजन से ऊपर है, रिलीजन धर्म के अनुसार चलते है तो मनुष्य को मुक्ति दिलाते है, जब रिलीजन धर्म को छोड़कर चलते है तो साम्प्रदायिक कलह होते है, धर्म के नाम पर अत्याचार होते है,
- जब जब भारतीयों का भारत पर राज्य रहा तब भारत हमेशा धर्म पर ही चला है । पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि पश्चिम दिशा में एक हमारा द्वेष करने वाला है, बगैर कारण द्वेष करता है, बार-बार तकलीफ देता है। उसको हमने सबक भी कई बार सिखाया, लेकिन हमने कभी नहीं कहा कि हमने तुमको अलग किया, गलत हो गया, आ जाओ ऐसा हमने नहीं कहा, तुम्हें अलग जीना है, जियो। हमारे देश मे कितने ही विचारधारा की सरकारें हो गई सबका रवैया एक ही रहा है। दुनिया के संघर्षों में हम बीच में नहीं पड़े, हमने सबको जोड़ने का प्रयास किया, हमें तकलीफ देने वालों को उनके संकट समय में हमने मदद की क्योंकि हमारे डीएनए में धर्म है, यह धर्म ही हमे चलाएगा।
यहां बता दें कि गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेवाज्ञ संस्थानम् के इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। दूसरे दिन करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले साल इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा
