एमपीसीडीएफ के किसान संवाद में छह दुग्ध संघों के उत्पादकों ने रखे अपने विचार, सहकारी समितियों के संचालन और किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) द्वारा शुक्रवार को होटल पलाश में दुग्ध उत्पादकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों से सीधे संवाद कर उनकी अपेक्षाओं, समस्याओं और सुझावों को समझना तथा प्रदेश की सहकारी डेयरी व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और बुंदेलखंड दुग्ध संघों के उत्पादकों को अपने विचार रखने का अवसर दिया गया। चर्चा का मुख्य केंद्र दुग्ध सहकारी समितियों का संचालन, मौजूदा प्रबंधन व्यवस्था, पशुपालकों को उपलब्ध सेवाएं, दुग्ध संघों से उनकी अपेक्षाएं तथा सहकारी व्यवस्था में किसानों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक श्री जयदेव बिस्वास ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एमपीसीडीएफ के समूह प्रमुख (फील्ड ऑपरेशंस) श्री मिलन मिश्रा ने एनडीडीबी द्वारा एमपीसीडीएफ एवं दुग्ध संघों का प्रबंधन संभालने के बाद हुई प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुतीकरण दिया।
प्रबंध संचालक श्री जयदेव बिस्वास ने कहा, “दुग्ध उत्पादक हमारी सहकारी डेयरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सहकारी संस्थाओं की वास्तविक मजबूती किसानों की सक्रिय भागीदारी और उनके विश्वास से आती है। हमारा प्रयास है कि दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं और सुझावों को सीधे समझकर व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया जाए। एनडीडीबी के मार्गदर्शन में हम ऐसी व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें किसानों को बेहतर सेवाएं, पारदर्शी कार्यप्रणाली और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलें।”
संवाद सत्रों में दुग्ध सहकारी समितियों के संचालन से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों, समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार, पशुपालकों के लिए आवश्यक सेवाओं तथा दुग्ध संघों और एमपीसीडीएफ से उनकी अपेक्षाओं पर विचार-विमर्श किया गया। जमीनी स्तर पर सहकारी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुधार के उपायों पर भी चर्चा केंद्रित रही।
कार्यक्रम में सभी छह दुग्ध संघों के उत्पादकों के लिए अलग-अलग संवाद सत्र रखे गए, जिनका संचालन संबंधित दुग्ध संघों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों ने किया। इन सत्रों के माध्यम से क्षेत्रवार समस्याओं और सुझावों को सामने लाने का अवसर प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में श्री असीम निगम ने आभार व्यक्त किया।
