स्वदेशी अपनाकर ही 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होगा : उपमुख्यमंत्री राजेश शुक्ला

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मानसिक गुलामी से मुक्त होकर स्वावलंबन की ओर बढ़ना होगा: हेमंत सेठिया

भोपाल। वर्ष 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग आवश्यक है। देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जब हम विदेशी वस्तुओं का उपयोग करते हैं तो उससे दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, जबकि स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने से अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यह बात मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेश शुक्ला ने स्वदेशी मेले में कही।

स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वदेशी मेला शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर, भोपाल में 4 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में स्वदेशी उत्पादों के साथ स्थानीय उद्यमियों, महिला उद्यमियों और युवाओं को अपने उत्पादों एवं कार्यों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

उपमुख्यमंत्री राजेश शुक्ला ने कहा कि 2047 तक आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वदेशी के विचार को समझना और अपनाना होगा। ऊपर पहुंचना बड़ी बात नहीं है, बल्कि वहां बने रहना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने रासायनिक खाद का उदाहरण देते हुए कहा कि आज डीएपी और यूरिया लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान कतार में रहते हैं, जबकि इनके अत्यधिक उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है। इनके आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी खर्च होती है।

शुक्ला ने कहा कि भारत में गाय को पूजनीय माना गया है और उसे मंत्र का दर्जा दिया गया है। गाय केवल दूध ही नहीं देती, बल्कि उसके गोबर से भी खाद तैयार होती है, जो डीएपी और यूरिया का स्वदेशी विकल्प बन सकती है। स्वदेशी मंच इस तरह के विकल्पों को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश का पैसा देश में ही लगेगा, तभी भारत आत्मनिर्भर बन सकेगा। जन-जन को स्वदेशी के विचार से जुड़ना होगा। भारत को विश्व में अपनी पहचान और ध्वज स्थापित करने के लिए स्वदेशी को अपनाना जरूरी है।

स्वदेशी मेला सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का मंच: सविता दीवान

भाजपा की पूर्व विधायक सविता दीवान ने कहा कि स्वदेशी मेले में ऐसा वातावरण दिखाई दे रहा है, मानो पूरा भारत यहां एकत्र हो गया हो। भारत मेलों का देश रहा है और मेले हमेशा से सामाजिकता तथा लोगों को जोड़ने का माध्यम रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी कोई नया विचार नहीं है। आजादी के आंदोलन के समय महात्मा गांधी ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और उनके दहन के माध्यम से स्वदेशी का संदेश दिया था। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है। इस मेले के आयोजन से कार्यकर्ताओं, लघु उद्यमियों और यहां खरीदारी करने आने वाले लोगों में स्वदेशी का भाव विकसित होता है। विश्व गुरु बनने की दिशा में यह हमारा छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।

स्वदेशी केवल वस्तु नहीं, बल्कि जीवन का भाव है: डॉ निवेदिता शर्मा

बाल अधिकार संकर्षण आयोग मध्य प्रदेश की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने कहा कि स्वदेशी केवल कोई उत्पाद या वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक भाव है, जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर होना चाहिए। चाहे वह स्वभाषा हो, स्वभोजन हो या स्वदेशी सामान, हर क्षेत्र में इस भावना को अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देश में बनने वाली वस्तु तभी वास्तविक अर्थों में स्वदेशी का उद्देश्य पूरा करती है, जब उससे अर्जित धन देश के विकास में लगे। गांवों की बात तो सभी करते हैं, लेकिन उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हमें अपने स्तर पर क्या करना चाहिए, इस पर भी विचार करना होगा। स्वदेशी के भाव के लिए अपने स्वार्थ की भावना को पीछे रखना होगा। केवल अपना विकास करने से देश आगे नहीं बढ़ेगा, बल्कि हमें सामूहिक विकास के बारे में सोचना होगा।

निवेदिता शर्मा ने हरित क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कुछ उपायों से कृषि उत्पादन बढ़ा, लेकिन उनमें से कई उपाय तात्कालिक साबित हुए। आज भी किसान अपने खेत में उगाए अनाज से अगली फसल के लिए बीज नहीं बचा पा रहे हैं और उन्हें बाहर से बीज खरीदने पड़ते हैं। यह विचारणीय विषय है। देश की अर्थव्यवस्था में गांवों और किसानों का बड़ा योगदान है। इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को मजबूत करना जरूरी है।

मानसिक गुलामी से मुक्त होकर स्वावलंबन की ओर बढ़ना होगा: हेमंत सेठिया

मध्य भारत प्रांत के प्रांत कार्यवाहक हेमंत सेठिया ने कहा कि भारत को विश्व गुरु और आत्मनिर्भर बनाने में इस तरह के मेलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत को उस स्थिति तक पहुंचाने के लिए प्रयास करने होंगे, जहां कभी देश की विश्व अर्थव्यवस्था में 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हुआ करती थी।

उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन के समय कुछ लोग केवल देश की स्वतंत्रता के बारे में सोच रहे थे, लेकिन आजादी के बाद देश कैसे चलेगा, इसकी चिंता सभी को नहीं थी। स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने स्व के आधार पर आचरण करने और स्वयं को मजबूत बनाने का विचार दिया था। केवल आर्थिक रूप से मजबूत होना पर्याप्त नहीं है, मानसिक गुलामी से मुक्त होना भी जरूरी है।

हेमंत सेठिया ने कहा कि आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अलग-अलग विचारधाराओं को अपनाया गया। पहले पूंजीवाद की ओर देखा गया, फिर साम्यवाद और उसके बाद मिश्रित अर्थव्यवस्था का रास्ता अपनाया गया। इसी दौर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे विचारकों ने स्वावलंबन का विचार सामने रखा। उस समय यह विचार नया लग सकता था, लेकिन आज देश में इस दिशा में प्रयास हो रहे हैं और स्वदेशी की भावना को समझकर लागू किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनने के लिए भारत को अपने स्व के आधार पर आगे बढ़ना होगा। आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है कि वह आगे बढ़कर दुनिया को कोई दिशा दिखाए। भारत यह भूमिका निभा सकता है।

स्वदेशी मेले के सातवें दिन आयोजित हुई भारतीय परिधान प्रतियोगिता

मेले के सातवें दिन भारतीय परिधान प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने भारत की पारंपरिक वेशभूषा और विभिन्न परिधानों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में सोनम सिंह ने प्रथम, आस्था अग्रवाल ने द्वितीय और कनिका ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

गरबा और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने सजाई सांस्कृतिक संध्या

मेले के सातवें दिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गरबा नृत्य, एकल गायन और भारत के विभिन्न लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां हुईं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक दिखाई।

मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के समूह ने मंच पर सूर्य नमस्कार की प्रस्तुति दी। इसके माध्यम से बच्चों ने योग और स्वदेशी की भावना का प्रदर्शन किया। योग भारत की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे आज विश्वभर में पहचान मिली है।

कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत भदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और विनय कुमार सोनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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