मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हबीबगंज थाने से जुड़ा करीब 3 मिनट 30 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी एक युवक के साथ मारपीट करते और उसे घसीटते हुए थाने के अंदर ले जाते दिखाई दे रहे है इस घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और थाने में फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, थाना हबीबगंज क्षेत्र में दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों पक्ष शिकायत लेकर थाने पहुंचे। आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई से एक पक्ष संतुष्ट नहीं था और इसी दौरान थाने में हंगामे की स्थिति बन गई। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की जांच और पूरे विवाद की परिस्थितियां स्पष्ट होना अभी बाकी है।
पुलिस की वर्दी कानून की ताकत है, मनमानी का लाइसेंस नहीं!
वीडियो में दिखाई दे रहे मारपीट की वीडियो की जांच होना चाहिए थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच होना चाहिए, कि युवक के साथ बल प्रयोग की नौबत क्यों आई? क्या पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई की या गुस्से में आकर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया? क्या युवक को काबू में करने के लिए बल प्रयोग आवश्यक था? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आना चाहिए।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर फरियादी पक्ष के किसी व्यक्ति ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की, हाथापाई की या सरकारी काम में बाधा पहुंचाई, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है, चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी पुलिसकर्मी।
सिर्फ एक पक्ष पर कार्रवाई क्यों? पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी।
इस मामले में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस ने किस आधार पर कार्रवाई की, क्या दोनों पक्षों की शिकायतों पर नियमानुसार सुनवाई हुई और क्या थाने में हुई कथित मारपीट के संबंध में अलग से जांच की गई? यदि किसी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई हुई है, तो उसके पीछे मौजूद साक्ष्य और कानूनी आधार भी सामने आना चाहिए।
अब सवाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से है क्या वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी? क्या थाने में मौजूद सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयानों की पड़ताल होगी? क्या फरियादी पक्ष की भूमिका और पुलिस के बल प्रयोग, दोनों की निष्पक्ष जांच होगी?
कानून सबके लिए बराबर है।
अगर फरियादी पक्ष ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अगर पुलिसकर्मियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए मारपीट की है, तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
हबीबगंज थाने का यह मामला केवल एक विवाद नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है। सच्चाई वीडियो के अधूरे दृश्यों या एकतरफा आरोपों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और सामने आए तथ्यों से तय होनी चाहिए।
