श्रीगणेश ने ब्राह्मण रूप धारण कर किया लोककल्याण, फिर प्रकट हुए शिवेश्वर महादेव डॉ.नवीन आनंद जोशी
उज्जैन की चौरासी महादेव यात्रा में 37वाँ स्थान श्री शिवेश्वर महादेव का है। महाकाल वन क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन एवं पूजनीय शिवलिंग श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार इस शिवलिंग की स्थापना भगवान शिव के आदेश से गणेशजी द्वारा कराई गई थी, इसलिए इसका नाम “शिवेश्वर” पड़ा।
प्राचीन काल में महाकाल वन क्षेत्र में रिपुंजय नामक एक प्रतापी और धर्मनिष्ठ राजा राज्य करते थे। वे अपनी प्रजा का पुत्रवत् पालन करते थे तथा भगवान विष्णु की भक्ति में सदैव लीन रहते थे। उनके शासन में प्रजा सुखी, समृद्ध और निःशंक थी। राजा के तेज, धर्म और यश का प्रभाव इतना व्यापक था कि सम्पूर्ण राज्य उनके गुणों का ही गुणगान करता था।उसी समय भगवान शिव ने विचार किया कि महाकाल वन में उनके अनेक स्वरूप प्रतिष्ठित हैं, किंतु इस क्षेत्र में एक विशेष शिवलिंग की स्थापना अभी शेष है। तब उन्होंने अपने प्रिय गण श्री गणेश जी को आदेश दिया कि वे उज्जयिनी में जाकर शिवतत्त्व का प्रचार करें और उचित अवसर आने पर वहां दिव्य शिवलिंग की स्थापना करें।
भगवान की आज्ञा पाकर शिवगण गणेश जी ब्राह्मण का रूप धारण कर उज्जयिनी में रहने लगा। वह अपने ज्ञान, तप और औषधि-विज्ञान से लोगों के कष्ट दूर करने लगा। रोगी उसके उपचार से स्वस्थ होने लगे और संतानहीन दंपतियों को भी उसकी कृपा से संतान-सुख प्राप्त होने लगा। धीरे-धीरे उसकी ख्याति पूरे नगर में फैल गई।उस समय राजा रिपुंजय की प्रिय रानी बहुला देवी संतान-सुख से वंचित थीं। रानी की एक सखी ने उस दिव्य ब्राह्मण के विषय में सुनकर उससे प्रार्थना की कि वह राजमहल चलकर रानी को आशीर्वाद प्रदान करे। ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि वह बिना राजा की आज्ञा के राजमहल में प्रवेश नहीं करेगा।तब रानी ने स्वयं अस्वस्थ होने का बहाना बनाया और राजा रिपुंजय के साथ उस ब्राह्मण के दर्शन हेतु पहुँचीं। जैसे ही राजा और रानी ने श्रद्धापूर्वक उस ब्राह्मण के दर्शन किए, वह तत्काल दिव्य शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गया। यह अद्भुत दृश्य देखकर राजा और रानी विस्मित रह गए तथा उन्होंने अत्यंत श्रद्धा से उस शिवलिंग का पूजन किया।उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और बोले
“हे राजन्! तुम्हारे यहाँ एक तेजस्वी, धर्मात्मा और यशस्वी संतान का जन्म होगा, जो आगे चलकर महान सम्राट बनेगा।”
भगवान शिव के वरदान से राजा रिपुंजय की मनोकामना पूर्ण हुई। चूँकि भगवान के गण ने ही शिवलिंग रूप धारण किया था, इसलिए यह दिव्य शिवलिंग “श्री शिवेश्वर महादेव” के नाम से विख्यात हुआ।
यात्रा निरंतर..
