क्रेडिट मॉनिटरिंग बनी मुख्यधारा: 183 मिलियन भारतीय अब स्वयं कर रहे हैं अपने सिबिल स्कोर की निगरानी

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  • दिसंबर 2025 तक पहली बार अपने सिबिल स्कोर की निगरानी करने वाले उपभोक्ताओं में सालाना (YoY) 27% की वृद्धि हुई।
  • निगरानी करने वाले उपभोक्ताओं का औसत सिबिल स्कोर बढ़कर 728 हुआ; 45% लोगों ने निगरानी शुरू करने के छह महीने के भीतर अपने स्कोर में सुधार किया।
  • मिलेनियल, जेन-जी उपभोक्ता, महिलाएं और गैर-मेट्रो क्षेत्र क्रेडिट परिदृश्य में इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं।

मुंबई भारत सक्रिय और सूचित क्रेडिट स्वामित्व के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ क्रेडिट स्कोर की निगरानी करना अब रोज़मर्रा के वित्तीय व्यवहार का हिस्सा बनता जा रहा है। ट्रांसयूनियन सिबिल की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, जो गतिविधि कभी केवल ऋण लेने के समय की जाती थी, वह अब वित्तीय स्वच्छता (financial hygiene) का एक मुख्य हिस्सा बन गई है।

दिसंबर 2025 तक, अपने सिबिल स्कोर की स्वयं निगरानी करने वाले भारतीयों की संख्या बढ़कर 183 मिलियन हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 45% उपभोक्ताओं ने निगरानी शुरू करने के छह महीने के भीतर अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार किया। निगरानी करने वाले उपभोक्ताओं का औसत सिबिल स्कोर 728 रहा, जो सक्रिय निगरानी और स्वस्थ क्रेडिट प्रोफाइल के बीच सीधे संबंध को दर्शाता है।

ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ, श्री भावेश जैन ने कहा: “ऐतिहासिक रूप से, उपभोक्ता अपने क्रेडिट प्रोफाइल पर तभी ध्यान देते थे जब उन्हें व्यक्तिगत ऋण या क्रेडिट कार्ड की आवश्यकता होती थी। आज, निगरानी केवल एक लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे निरंतर वित्तीय स्वच्छता के रूप में अपनाया जा रहा है। भारत केवल क्रेडिट लेने से आगे बढ़कर अब क्रेडिट की जिम्मेदारी संभालने (taking charge) की ओर बढ़ रहा है।”

गैर-मेट्रो क्षेत्र: विकास का नया मोर्चा भारत का क्रेडिट जागरूकता आंदोलन अब तेजी से गैर-मेट्रो क्षेत्रों द्वारा आकार ले रहा है। दिसंबर 2025 तक, निगरानी करने वाले कुल उपभोक्ताओं में से 75% गैर-मेट्रो स्थानों से थे, जिनमें सालाना 28% की वृद्धि देखी गई। क्रेडिट की गुणवत्ता के मामले में भी ये क्षेत्र आगे हैं, जहाँ 73% ‘प्राइम स्कोर’ (731+) वाले उपभोक्ता इन्हीं बाजारों से आते हैं।

जेन-जी (Gen Z): भारत की पहली ‘क्रेडिट-नेटिव’ पीढ़ी मिलेनियल और जेन-जी (1997-2012 के बीच जन्मे) कुल निगरानी करने वाले उपभोक्ताओं का 77% हिस्सा हैं। जेन-जी उपभोक्ता विशेष रूप से सक्रिय हैं और उनकी निगरानी गतिविधियों में 1.41 गुना वृद्धि देखी गई है। यह पीढ़ी ऋण के प्रति रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रही है; निगरानी करने वाले जेन-जी उपभोक्ताओं में गोल्ड लोन की मांग में 61% और अर्ध-शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में टू-व्हीलर लोन में 23% की वृद्धि देखी गई है।

महिलाएं: वित्तीय परिदृश्य की नई मार्गदर्शक महिलाएं भारत के वित्तीय परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं। दिसंबर 2025 तक, क्रेडिट स्कोर की निगरानी करने वाली महिलाओं की संख्या में 38% की सालाना वृद्धि हुई, जबकि पुरुषों में यह वृद्धि 25% थी। निगरानी करने वाली 63% महिलाएं ‘प्राइम स्कोर’ (731+) बनाए हुए हैं, जो उनके जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार को दर्शाता है।

क्रेडिट मॉनिटरिंग एक आंदोलन के रूप में निगरानी करने वाले भारतीयों के बीच गोल्ड लोन की लोकप्रियता बढ़ी है, जो अब आपातकालीन विकल्प से हटकर एक मुख्यधारा का वित्तीय साधन बन गया है। निगरानी शुरू करने के तीन महीने के भीतर गोल्ड लोन में 25% की वृद्धि देखी गई। इसी तरह, टू-व्हीलर लोन में भी 6% की वृद्धि हुई है।

श्री जैन ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “क्रेडिट मॉनिटरिंग अब एक जन-व्यवहार बन चुका है। गैर-मेट्रो भारत वित्तीय समावेशन के नए आयाम लिख रहा है। हम हर पात्र उपभोक्ता और व्यवसाय के लिए क्रेडिट तक जिम्मेदार पहुँच सुनिश्चित करने और वित्तीय समावेशन को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।”

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