मुंबई : एसबीआई (SBI) रिसर्च की नवीनतम ‘इकोव्रैप’ रिपोर्ट में भारतीय रुपये को बाहरी झटकों से बचाने के लिए ठोस और स्पष्ट उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति मज़बूत है और विकास दर स्थिर बनी हुई है, फिर भी रुपया अपनी वास्तविक आर्थिक क्षमता (fundamentals) की तुलना में अधिक गिरावट का सामना कर रहा है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि वर्तमान स्थिति 2013 के संकट से अलग है; इसलिए, विदेशी कर्ज जुटाने जैसे पुराने तरीकों के बजाय वर्तमान में वैकल्पिक तंत्र अपनाना अधिक समझदारी होगी, क्योंकि विकसित बाजारों में बॉन्ड यील्ड की अस्थिरता से कर्ज की लागत बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 10 महीने से अधिक के आयात के लिए पर्याप्त है और सट्टेबाजी की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। रुपये को और अधिक स्थिरता प्रदान करने के लिए, एसबीआई रिसर्च ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए एक विशेष ‘डॉलर विंडो’ शुरू करने और बाहरी बाजारों से मुद्रा की मांग को पूरा करने जैसे सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि रिजर्व बैंक द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ-साथ इन विशेष उपायों को अपनाने से रुपये को उचित स्तर पर लाने में मदद मिलेगी, जिससे देश की राजकोषीय सेहत पर बोझ डाले बिना निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा सकेगा।
