सोशल मीडिया पर बारकोड शेयर कर लोगों से मांगे जा रहे पैसे।
ठग घर-घर पहुंचकर कैश चंदा ऐंठने की भी कर रहे कोशिश।
मस्जिद कमेटी ने साफ कहा- ये बारकोड हमारे नहीं हैं।
कमेटी ने लोगों से फर्जी बारकोड पर एक रुपया भी न भेजने की अपील की।
सदर अब्दुल मन्नान बोले- कमेटी ने किसी से चंदा नहीं मांगा है।
आर्थिक मदद से पहले कमेटी या इमाम से संपर्क कर पुष्टि करने की सलाह।
शाही मस्जिद का सड़क चौड़ीकरण की जद में आया करीब साढ़े 3 फीट हिस्सा हटाया जा रहा।
मस्जिद विवाद के बीच ठग सक्रिय—बारकोड देखकर पैसे भेजना पड़ सकता है भारी
