स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) भोपाल का 13वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 233 विद्यार्थियों को प्रदान की गईं उपाधियां

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स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), भोपाल का 13वां दीक्षांत समारोह 10 अक्टूबर 2026 को संस्थान परिसर में आयोजित किया गया। समारोह में नीति आयोग की सदस्य डॉ. जोरम अनिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के कुल 233 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही, शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न पदकों एवं पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

समारोह का शुभारंभ एसपीए भोपाल के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. एच. डी. चारण द्वारा किया गया। इसके पश्चात संस्थान के निदेशक प्रो. कैलाश राव एम. ने मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया और संस्थान की वार्षिक निदेशक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में पिछले एक वर्ष के दौरान संस्थान की प्रमुख शैक्षणिक, शोध एवं अन्य गतिविधियों तथा उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया कि संस्थान के विद्यार्थियों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों और अधिवेशनों में भाग लेकर संस्थान का गौरव बढ़ाया है। संस्थान में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं के आयोजन के साथ-साथ प्रतिष्ठित परामर्श परियोजनाओं के माध्यम से भी उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. एच. डी. चारण ने मुख्य अतिथि डॉ. जोरम अनिया का स्वागत करते हुए उनका परिचय दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जीवन की सार्थकता केवल प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, सहपाठियों, सहयोगियों, समुदायों और प्रकृति के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ने में निहित है। उन्होंने विभिन्न विचारों का सम्मान करने, एक-दूसरे का सहयोग करने और ऐसे अवसर एवं स्थान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जहां सभी को प्रगति करने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जो व्यक्तिगत विकास के साथ समाज और पूरी दुनिया के कल्याण में भी योगदान दे।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. जोरम अनिया ने विद्यार्थियों से भारत की समृद्ध स्थापत्य विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक तकनीक और नवीन डिजाइन पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन, सहानुभूति और निरंतर सीखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वास्तुकला एवं शहरी नियोजन में मानवीय आवश्यकताओं, सुरक्षा, समावेशिता और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

राष्ट्र निर्माण में वास्तुकारों और नगर नियोजकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए डॉ. अनिया ने विद्यार्थियों से टिकाऊ, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त भवनों एवं शहरों के विकास के माध्यम से ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उल्लेख करते हुए स्थानीय समुदायों से सीखने तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक डिजाइन एवं नियोजन प्रक्रियाओं में समाहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

समारोह में कुल 233 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 108 स्नातक, 124 स्नातकोत्तर और एक पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाला विद्यार्थी शामिल है। विद्यार्थियों को बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, बैचलर ऑफ प्लानिंग, मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (कंजर्वेशन), मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (लैंडस्केप), मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (अर्बन डिजाइन), मास्टर ऑफ डिजाइन, मास्टर ऑफ प्लानिंग (एनवायरनमेंटल प्लानिंग), मास्टर ऑफ प्लानिंग (ट्रांसपोर्ट प्लानिंग एंड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट) तथा मास्टर ऑफ प्लानिंग (अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग) सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं।

शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समारोह में दो ‘मेडल ऑफ एक्सीलेंस’, दस ‘प्रोफिशिएंसी गोल्ड मेडल’ और 15 ‘बेस्ट थीसिस अवार्ड’ प्रदान किए गए। इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों के चयनित शैक्षणिक कार्यों एवं सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में स्टूडियो कार्य, पोस्टर और अन्य रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा, नवाचार एवं शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।

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