मुंबई : 6-8 अप्रैल 2026 को होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले, एसबीआई (SBI) रिसर्च की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखेगा। “मरकरी राइजिंग” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक तेल बाजार में 1973 के बाद आए सबसे बड़े संकट के कारण यह निर्णय लिया जा सकता है।
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं और रुपया प्रति डॉलर 93 के स्तर के करीब है, जिससे भारत में “आयातित मुद्रास्फीति” (Imported Inflation) का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, ‘सुपर अल नीनो’ की संभावना ने घरेलू मुद्रास्फीति पर दबाव और बढ़ा दिया है। हालांकि आरबीआई ने मुद्रा को सहारा देने के लिए ऑनशोर और ऑफशोर बाजारों में सट्टेबाजी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन एसबीआई रिसर्च का मानना है कि वर्तमान अनिश्चित समय को देखते हुए केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत घोषणाओं में काफी सावधानी बरतेगा। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आरबीआई का मुख्य ध्यान विकास को गति देने और अस्थिर महंगाई को नियंत्रित करने के बीच संतुलन बनाने पर होगा।
