- महीने भर चलने वाली राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत; डिजिटल और जमीनी सहायता तंत्र को किया मज़बूत।
प्रमुख बिंदु:
- 2022 से अब तक ‘पे ऑटेंशन’ के माध्यम से 45,000+ परिवारों तक पहुंच बनाई।
- ई-सानिध्य (E-Sanidhya) प्लेटफॉर्म के जरिए 14,000+ उपयोगकर्ताओं को फ्री स्क्रीनिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन।
- त्वरित सहायता के लिए समर्पित टोल-फ्री ऑटिज्म हेल्पलाइन (1800 2099 488) संचालित।
मुंबई : भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक, टाटा पावर ने राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPID) के सहयोग से अपनी प्रमुख पहल ‘पे ऑटेंशन’ के तहत ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस’ मनाया। चेम्बूर के ट्रॉम्बे कम्युनिटी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम के साथ ही ऑटिज्म जागरूकता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए महीने भर चलने वाली पहलों की शुरुआत की गई।
2022 में अपनी शुरुआत के बाद से ‘पे ऑटेंशन’ ने भारत भर में 45,000 से अधिक परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। इस पहल का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि सहायता प्रणालियों को मज़बूत करना, देखभाल करने वालों (caregivers) की क्षमता बढ़ाना और संस्थागत भागीदारी को बढ़ावा देना है।
डिजिटल सशक्तिकरण और सहायता: इस पहल का एक मुख्य स्तंभ ई-सानिध्य (E-Sanidhya) पोर्टल है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय एवं टाटा एल्सो (Tata Elxsi) के साथ साझेदारी में विकसित यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विशेषज्ञों द्वारा तैयार संसाधन, रिमोट स्क्रीनिंग और परामर्श प्रदान करता है। वर्तमान में यह पोर्टल 14,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं की सहायता कर रहा है, जिससे विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में ऑटिज्म की पहचान और उपचार में मदद मिल रही है। इसके साथ ही, टाटा पावर एक समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800 2099 488) भी चलाता है।
ट्रॉम्बे में आयोजित कार्यक्रम: ट्रॉम्बे में आयोजित कार्यक्रम में न्यूरोडायवर्स व्यक्तियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, डांस मूवमेंट और योग-आधारित चिकित्सीय सत्र आयोजित किए गए। वहां एक ‘सेंसरी रूम’ और ‘एक्सपेरिमेंटल ज़ोन’ भी बनाया गया, जहाँ बच्चों ने स्टोन पेंटिंग, मंडला आर्ट और लेगो (LEGO) आधारित ‘प्ले थेरेपी’ के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर टाटा पावर के सीएचआरओ और प्रमुख (सस्टेनेबिलिटी एवं सीएसआर), श्री हिमल तिवारी ने कहा: “ऑटिज्म से जूझ रहे परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल जागरूकता नहीं, बल्कि सही जानकारी और समय पर निदान तक पहुंच (Access) है। टाटा पावर में हमारा प्रयास एनआईईपीआईडी (NIEPID) जैसे संस्थानों और ई-सानिध्य जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस अंतर को कम करना है। हमारा लक्ष्य तकनीक और साझेदारी का उपयोग कर इस सहायता को और गहरा बनाना है ताकि समावेशिता हर परिवार के लिए एक विश्वसनीय वास्तविकता बन सके।”
भविष्य की योजनाएं: टाटा पावर ने ‘पे ऑटेंशन’ के अगले चरण की घोषणा की है, जिसमें ई-सानिध्य प्लेटफॉर्म का हिंदी, ओडिया, तमिल, मराठी और तेलुगु जैसी भाषाओं में विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी लेगो फाउंडेशन की ‘सिक्स ब्रिक्स’ (Six Bricks) पद्धति का उपयोग करके अपने खेल-आधारित शिक्षण कार्यक्रम का भी विस्तार करेगी।
जागरूकता प्रयासों के तहत, टाटा पावर ने मुंबई, दिल्ली और ओडिशा के अपने प्रमुख कार्यालयों को नीली रोशनी (ऑटिज्म जागरूकता का वैश्विक प्रतीक) से रोशन किया। तमिलनाडु में भी कंपनी ने ‘टीएन राइट्स प्रोजेक्ट’ (TN Rights Project) के तहत सरकार के सहयोग से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें 300 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
