भोपाल : विविधीकृत अदाणी पोर्टफोलियो की प्रमुख कंपनी और बिल्डिंग मटेरियल्स क्षेत्र की दिग्गज एसीसी (ACC), मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निर्माण पेशेवरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। कंपनी का ‘लॉयल्टी-आधारित जुड़ाव’ और तकनीकी मार्गदर्शन न केवल निर्माण की गुणवत्ता सुधार रहा है, बल्कि छोटे कारीगरों को बड़े ठेकेदार के रूप में स्थापित होने में मदद कर रहा है।
इसका जीवंत उदाहरण हैं उमेश पंडित, जो मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और आज भोपाल के एक विश्वसनीय ठेकेदार बन चुके हैं। उनकी यात्रा एक साधारण मजदूर से शुरू हुई, जो अपनी मेहनत से राजमिस्त्री बने और अब एसीसी के सहयोग से सफल ठेकेदारी कर रहे हैं।
बदलाव की शुरुआत: तकनीक और भरोसे का संगम
उमेश पंडित का एसीसी के साथ सफर साल 2024 में शुरू हुआ। एसीसी के टेक्निकल सर्विसेज इंजीनियर (TSE) धनंजय सिंह ने उन्हें कंपनी के उन विशेष प्रोग्राम्स से परिचित कराया, जो केवल सीमेंट बेचने तक सीमित नहीं हैं:
- एसीसी सर्टिफाइड टेक्नोलॉजी (ACT): उमेश ने अब तक 8 ऐसे घरों का निर्माण किया है जो पूरी तरह से एसीसी की आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता मानकों पर आधारित हैं।
- इंजीनियरों का परामर्श: निर्माण के हर चरण में एसीसी के इंजीनियरों से मिलने वाली सलाह ने उनकी कार्यकुशलता को बढ़ाया है, जिससे बाजार में उनका नाम एक ‘क्वालिटी बिल्डर’ के रूप में उभरा है।
ठेकेदारों के लिए ‘एसीसी इकोसिस्टम’ के फायदे
एसीसी अपने नेटवर्क से जुड़े पेशेवरों को कई तरह की योजनाओं के जरिए सशक्त बना रहा है, जिनमें उमेश पंडित की प्रगति मुख्य रूप से इन पहलों से प्रेरित रही:
- रिवॉर्ड कनेक्ट और सिल्वर स्कीम: वफादार ठेकेदारों के लिए विशेष प्रोत्साहन और वित्तीय लाभ।
- कॉन्ट्रैक्टर पासपोर्ट: पेशेवर पहचान और उनके काम का रिकॉर्ड रखने का एक डिजिटल माध्यम।
- तकनीकी वर्कशॉप्स: नई निर्माण शैलियों और निर्माण सामग्री के सही उपयोग का निरंतर प्रशिक्षण।
स्थानीय बाजार में बढ़ता प्रभाव
उमेश पंडित की सफलता यह दर्शाती है कि जब सही उत्पाद को सही तकनीकी सहयोग मिलता है, तो परिणाम उत्कृष्ट होते हैं। एसीसी का यह मॉडल भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में ठेकेदारों की क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। यह पहल न केवल निर्माण जगत के “जमीनी नायकों” को पहचान दिला रही है, बल्कि ग्राहकों को भी मजबूत और टिकाऊ घर सुनिश्चित कर रही है।
