- अग्रणी वैश्विक लेखा निकाय ने भविष्य के लिए पारंपरिक ‘लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी’ (सीमित देयता कंपनी) की प्रासंगिकता पर उठाए सवाल।
- एसीसीए का तर्क है कि अब पारंपरिक मॉडल के विकल्प पर विचार करने का समय आ गया है।
एसीसीए (द एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘बिल्डिंग फ्यूचर बिजनेस’ में तर्क दिया है कि पारंपरिक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी का कानूनी स्वरूप अक्सर पर्यावरण और समुदायों की कीमत पर केवल वित्तीय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है। रिपोर्ट में शेयरधारक-प्रथम (Shareholder-priority) मॉडल से हटकर ऐसे मॉडल की ओर बढ़ने का सुझाव दिया गया है, जो वित्तीय परिणामों को सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों के साथ जोड़कर मापता है।
इस पहल पर बात करते हुए, एसीसीए (ACCA) इंडिया के निदेशक, मो. साजिद खान ने कहा, “आज व्यवसायों का मूल्यांकन केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि उनके द्वारा समुदायों, कर्मचारियों और पर्यावरण के लिए बनाए गए मूल्य (Value) से किया जा रहा है। पारंपरिक मॉडल अक्सर इन व्यापक जिम्मेदारियों के ऊपर वित्तीय रिटर्न को प्राथमिकता देता है। एसीसीए की ‘बिल्डिंग फ्यूचर बिजनेस’ रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि ‘बी कॉर्प्स’ (B Corps) और ‘इंटीग्रेटेड रिपोर्टिंग’ जैसे दृष्टिकोण अपनाने से कंपनियों को समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद मिल सकती है।”
एसीसीए में टैक्स और बिजनेस लॉ के प्रमुख, जेसन पाइपर ने कहा, “वित्तीय अनिवार्यता और समाज एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच का संघर्ष अब इतना बढ़ गया है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनी का वर्तमान स्वरूप पूंजी प्रदाताओं की रक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन अब ये वित्तीय सुरक्षा उपाय आर्थिक व्यवहार को विकृत कर रहे हैं। हमारे पास ‘बी कॉर्प्स’ और एकीकृत रिपोर्टिंग ढांचे के रूप में इसके संभावित समाधान मौजूद हैं।”
बेहतर व्यावसायिक मॉडल बनाने के लिए, रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि उद्यमों को कुछ प्रमुख प्रश्नों पर विचार करना चाहिए, जैसे:
- उनके मुख्य हितधारक (Stakeholders) कौन हैं और उनके लिए ‘मूल्य’ (Value) का क्या अर्थ है?
- आर्थिक गतिविधि से प्रत्येक हितधारक समूह तक मूल्य का प्रवाह कैसे होता है?
- नियामक और विधायी पारिस्थितिकी तंत्र में क्या मार्गदर्शन और कमियां मौजूद हैं?
- रिपोर्टिंग में विश्वास सुनिश्चित करने के लिए किन गुणात्मक विशेषताओं की आवश्यकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक मॉडल श्रम और वस्तुओं से हटकर ऊर्जा उपयोग और उच्च-पूंजी वाली मशीनों पर केंद्रित हो रहे हैं। ऐसे में व्यवसायों और समाज के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य हो गया है ताकि आर्थिक प्रगति सभी के लिए समावेशी हो सके।
