मुंबई : निगरानी प्रणालियों (Surveillance Systems) से संबंधित हालिया नियामक कार्रवाइयों ने भारत के सुरक्षा उद्योग को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा कर दिया है। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस बिजनेस के बिजनेस हेड, श्री पुष्कर गोखले ने कहा कि सीसीटीवी (CCTV) जैसी संवेदनशील श्रेणी में, जहाँ डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का सीधा संबंध है, वहां ‘भरोसा’ और ‘जवाबदेही’ वैकल्पिक नहीं बल्कि बुनियादी आवश्यकता होनी चाहिए।
डेटा की संवेदनशीलता और सप्लाई-चेन पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, भारतीय ब्रांड्स एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरे हैं। श्री गोखले के अनुसार, स्थानीय नियमों के पालन और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देने के कारण भारतीय कंपनियों ने अपनी साख मज़बूत की है। आज के दौर में सुरक्षा समाधान केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एक व्यापक ढांचे का हिस्सा बन चुके हैं।
इस बदलाव को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट से और अधिक मजबूती मिली है। यह कानून स्पष्ट करता है कि उपयोगकर्ता की सहमति स्वतंत्र, सूचित, विशिष्ट और स्पष्ट होनी चाहिए। निगरानी प्रणालियों के संदर्भ में, यह संगठनों के लिए अनिवार्य बनाता है कि वे डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग के बारे में पूरी तरह पारदर्शी रहें, ताकि व्यक्तियों का अपनी निजी जानकारी पर नियंत्रण बना रहे।
कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री गोखले ने कहा कि गोदरेज हमेशा से भारत की जरूरतों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय सुरक्षा समाधान तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करता रहा है। उनका लक्ष्य जिम्मेदारी और लचीलेपन के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए ग्राहकों को दीर्घकालिक सुरक्षा और मानसिक शांति प्रदान करना है।
