इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, हर थाने में साउंड मीटर देने के निर्देश; कचरा गाड़ियों का शोर भी 25% तक घटाने को कहा

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साइलेंस जोन की सूची अखबारों में प्रकाशित करनी होगी, हर वार्ड में दो स्वयंसेवक करेंगे शोर की निगरानी; तीन सप्ताह में मांगी अनुपालन रिपोर्ट

इंदौर / ( राजेश ज्वेल )शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस, नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने हर पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों को ध्वनि प्रदूषण मापने वाले उपकरण उपलब्ध कराने, साइलेंस जोन की सूची व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में प्रकाशित करने और नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों से होने वाले शोर को कम करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक 25397/2023 में पारित आदेश में कहा कि पूर्व में साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने के निर्देश का उचित पालन नहीं हुआ है। राज्य की ओर से केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के अंश प्रस्तुत किए गए, जिसे कोर्ट ने पर्याप्त नहीं माना। अब संबंधित अधिकारियों को साइलेंस जोन की सूची विधिवत प्रकाशित करनी होगी। साथ ही प्रमुखता वाले ऐसे अन्य स्थानों के संबंध में भी आम लोगों से सुझाव आमंत्रित करने होंगे, जिन्हें सूची में शामिल नहीं किया जा सका है।
हर पुलिस थाने में होगा ध्वनि प्रदूषण मापने का उपकरण
सुनवाई के दौरान खजराना के एसीपी आशीष पटेल ने ध्वनि प्रदूषण मापने वाला उपकरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि इस उपकरण का सार्वजनिक स्तर पर उपयोग कर शोर दर्ज करने और कार्रवाई करने की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे उपकरण इंदौर के प्रत्येक पुलिस थाने के उन पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराए जाएं, जो शिकायतों पर कार्रवाई के लिए सक्रिय ड्यूटी पर रहते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक थाने का संपर्क नंबर भी समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए, ताकि ध्वनि प्रदूषण से परेशान नागरिक तत्काल संबंधित पुलिसकर्मियों से संपर्क कर सकें।
नवरात्रि-दशहरा में शोर पर जताई नाराजगी
कोर्ट ने नवरात्रि और दशहरे के दौरान शहर में अनियंत्रित ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताई। आदेश में कहा गया कि पिछले त्योहारी सीजन में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति ऐसी रही कि पुलिस इसके स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करने में असहाय दिखाई दी।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर के विभिन्न पुलिस थानों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज की गई शिकायतों का विवरण भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है।
हर वार्ड में नियुक्त होंगे दो स्वयंसेवक
ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने में लोगों की हिचकिचाहट को देखते हुए हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था सुझाई है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक पुलिस थाने का थाना प्रभारी (एसएचओ) अपने क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवकों को नियुक्त करेगा।
ये स्वयंसेवक अपने क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण करने वाले व्यक्तियों या वाहनों की जानकारी तत्काल पुलिस को दे सकेंगे और घटना का वीडियो अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर सकेंगे। इससे उन नागरिकों को भी शिकायत दर्ज कराने में मदद मिलेगी, जो सीधे पुलिस के पास जाने में संकोच करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायत मिलने पर पुलिस कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई करे।
नगर निगम की कचरा गाड़ियों का शोर भी होगा कम
हाईकोर्ट ने नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों पर लगे लाउडस्पीकरों से बजने वाले स्वच्छता गीत की तेज आवाज पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को गाड़ियों के आने की सूचना देना आवश्यक है, लेकिन इससे होने वाला शोर भी निर्धारित कानूनी मानकों से अधिक नहीं होना चाहिए।
नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि इन वाहनों से उत्पन्न ध्वनि को निर्धारित अनुमेय डेसिबल सीमा तक कम किया जाए। ऐसा संभव नहीं होने की स्थिति में कम से कम वर्तमान आवाज की तुलना में 25 प्रतिशत तक ही रखने का निर्देश दिया गया है, यानी मौजूदा आवाज में कम से कम 75 प्रतिशत की कमी सुनिश्चित करनी होगी।
तीन सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट, 23 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को आदेश के पालन की रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति इंदौर नगर निगम की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ऋषि तिवारी को भी अनुपालन के लिए उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। कोर्ट ने शहर में शांति और ध्वनि प्रदूषण से राहत के लिए सभी संबंधित पक्षों के संयुक्त प्रयासों पर भरोसा जताया है।
हाईकोर्ट के इन निर्देशों का उद्देश्य इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना, नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और सार्वजनिक स्थानों पर शोर को निर्धारित मानकों के अनुरूप नियंत्रित करना है।

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