मुंबई : वैश्विक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने भौगोलिक सीमाओं को पूरी तरह बेमानी कर दिया है। कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ‘बॉर्डरलेस हेल्थकेयर’ का प्रदर्शन करते हुए देश की पहली ‘क्रॉस-बॉर्डर रिमोट रोबोटिक सर्जरी’ सफलतापूर्वक संपन्न की है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, मुंबई में मौजूद डॉ. टी. बी. युवराजा ने अत्याधुनिक ‘मेडबॉट तौमाई रोबोटिक सिस्टम’ का उपयोग कर मस्कट (ओमान) के एक अस्पताल में भर्ती 55 वर्षीय महिला की ‘रेडिकल नेफरेक्टोमी’ (किडनी निकालने की जटिल सर्जरी) की।
यह ऐतिहासिक प्रक्रिया सात समंदर पार बैठे सर्जन और मरीज के बीच निर्बाध ‘रियल-टाइम’ कनेक्टिविटी और रोबोटिक परिशुद्धता के कारण संभव हो सकी। कोकिलाबेन हॉस्पिटल, जो पहले से ही देश का अग्रणी ‘सेंटर फॉर रोबोटिक सर्जरी’ है, अब तीन अत्याधुनिक रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स के साथ वैश्विक स्तर पर चिकित्सा विशेषज्ञता का ‘कमांड सेंटर’ बनकर उभरा है। इस पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत अंजाम दिया गया।
यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. टी. बी. युवराजा ने इस सफलता पर कहा कि अब बेहतरीन चिकित्सा विशेषज्ञता भौगोलिक दूरियों की मोहताज नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल ‘मेडिकल टूरिज्म’ का डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि दुनिया भर के मरीजों को घर बैठे ‘रियल-टाइम’ विशेषज्ञ सेवा प्रदान करने वाला वैश्विक केंद्र बन रहा है। अस्पताल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ डॉ. संतोष शेट्टी ने इसे टेलीसर्जरी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि भविष्य की स्वास्थ्य सेवा में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है।
इस तकनीक के सफल प्रयोग से अब मरीजों को उन्नत इलाज के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जटिलताओं और भारी खर्चों से मुक्ति मिलेगी। यह ‘मरीज प्रथम’ के दृष्टिकोण को सार्थक करता है, जहाँ भारतीय डॉक्टर डिजिटल माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में जीवन रक्षक सर्जरी कर सकेंगे। यह उपलब्धि न केवल भारत के तकनीकी कौशल का प्रमाण है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में विशेषज्ञता और सुलभता के बीच की खाई को पाटने का एक सशक्त समाधान भी है।
