मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद, एसबीआई (SBI) रिसर्च ने अपनी ‘इकोव्रैप’ रिपोर्ट में गवर्नर के वक्तव्य को हाल के समय का “सबसे अधिक सतर्क और सचेत” बताया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है और अपना रुख ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि ब्याज दरों में तत्काल वृद्धि की संभावना नहीं है, लेकिन आरबीआई का संदेश पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक स्तर पर बदलती आर्थिक परिस्थितियों को लेकर गहरी चिंता दर्शाता है। एसबीआई रिसर्च ने ‘नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग’ (NLP) तकनीक का उपयोग करते हुए विश्लेषण किया कि वर्तमान गवर्नर के पिछले आठ बयानों की तुलना में यह बयान सबसे अधिक ‘हॉकिश’ (कठोर) और सतर्क है। इस सावधानी का मुख्य कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के बंद होने जैसी स्थिति है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और ‘आयातित मुद्रास्फीति’ का खतरा बढ़ गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए, आरबीआई ने वास्तविक जीडीपी विकास दर 6.9% और औसत मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू आर्थिक आधार मज़बूत होने के बावजूद, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और ‘सुपर अल नीनो’ की स्थिति महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, आरबीआई रुपये की स्थिति (जो फिलहाल प्रति डॉलर 93 के करीब है) को स्थिर रखने के लिए ‘नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड’ (NDF) बाजारों में सट्टेबाजी को रोकने पर कड़ी नजर रखे हुए है।
