मुंबई : भारत की हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति फरवरी 2026 में बढ़कर 3.21% हो गई, जो जनवरी 2026 में 2.75% थी । एसबीआई रिसर्च की नवीनतम “इकोरैप” (Ecowrap) रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य मुद्रास्फीति में भारी उछाल और आयातित मुद्रास्फीति (Imported Inflation) का निरंतर दबाव है ।
मुख्य निष्कर्ष:
- खाद्य मुद्रास्फीति में उछाल: फरवरी में खाद्य मुद्रास्फीति 129 आधार अंकों (bps) की छलांग लगाकर 3.55% पर पहुंच गई । ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति पूरी तरह से खाद्य कीमतों से संचालित थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में मिश्रित रुझान देखा गया ।
- कोर सीपीआई और राज्यों का रुझान: अखिल भारतीय कोर मुद्रास्फीति में 5 बीपीएस की मामूली वृद्धि हुई और यह 3.40% रही । हालांकि, राज्यों के स्तर पर रुझान अलग-अलग हैं; विशेष रूप से तेलंगाना की कोर सीपीआई फरवरी में 6% के स्तर को पार कर गई ।
- आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम: विनिमय दर में उतार-चढ़ाव (रुपया 91-93 प्रति डॉलर के बीच) और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण आयातित मुद्रास्फीति 5.7% पर रही, जो हेडलाइन दर से 245 बीपीएस अधिक है ।
- कीमती धातुओं का प्रभाव: फरवरी में ‘पर्सनल केयर’ मुद्रास्फीति 19.64% तक पहुंच गई, जिसका कारण सोने की कीमतों में 48.16% और चांदी की कीमतों में 160.84% की भारी वृद्धि है ।
- भविष्य का अनुमान: रिपोर्ट में 2026 के उत्तरार्ध में ‘अल नीनो’ (El Niño) के संभावित प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति के जोखिमों की चेतावनी दी गई है, जो भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही ऊर्जा और उर्वरकों की कीमतों में भू-राजनीतिक अस्थिरता भी चिंता का विषय है ।
