मुंबई — भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करने के फैसले के बाद एसबीआई रिसर्च ने आज अपनी नवीनतम इकोव्रैप (Ecowrap) रिपोर्ट जारी की। लगभग चार वर्षों के बाद की गई इस पहली ब्याज दर वृद्धि के साथ, एमपीसी ने अपने नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ करने का निर्णय लिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना समाप्त हो गई है और आगे के विकल्प केवल दर वृद्धि या ठहराव तक सीमित हैं। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि नवंबर 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति के 6.8% के शिखर पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए, आरबीआई दिसंबर की समीक्षा बैठक में 50 बीपीएस की एक और बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे पीक रेपो दर 6.0% तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर की नीतिगत घोषणाएं निगरानी (watchfulness) से स्पष्ट सख्ती (explicit tightening) की ओर बदलाव का संकेत देती हैं, जो कमजोर मानसून, अल नीनो की स्थितियों, और कच्चे तेल व कमोडिटी की अनिश्चित कीमतों के कारण बढ़े मुद्रास्फीति दबावों से प्रेरित हैं। इन परिस्थितियों के बीच, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को 40 बीपीएस बढ़ाकर 7.1% (Q2 FY27 के लिए 7.2%) कर दिया है, जबकि सीपीआई मुद्रास्फीति के अनुमान को 20 बीपीएस बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंचे भारतीय रुपये को सहारा देने के लिए, एसबीआई रिसर्च ने दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी को प्रोत्साहन देने, निर्यात आय वापसी की समय सीमा को 9 महीने से घटाकर 6 महीने करने और एमएसएफ (MSF) दरों के माध्यम से ब्याज दर कॉरिडोर को चौड़ा करने जैसे नीतिगत उपायों का सुझाव दिया है।
