समावेशिता (Inclusion) और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, टाटा पावर ने भारत के विभिन्न स्थानों पर अपने प्रमुख कार्यालयों को नीली रोशनी से रोशन कर ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस’ मनाया। अपनी प्रमुख पहल ‘पे ऑटेंशन’ (Pay Autention) के तहत संचालित इस गतिविधि का उद्देश्य ऑटिज्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना, न्यूरोडायवर्सिटी (Neurodiversity) की स्वीकृति को बढ़ावा देना और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम वाले व्यक्तियों के प्रति समर्थन प्रदर्शित करना था।
इस समन्वित राष्ट्रव्यापी प्रयास के तहत, टाटा पावर ने दिल्ली में ‘टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन’ (TPDDL), मुंबई में कार्नाक, महालक्ष्मी और बोरीवली कार्यालयों तथा ओडिशा में TPCODL, TPNODL, TPSODL और TPWODL के कार्यालयों को नीली रोशनी से जगमगाया। यह एकीकृत दृश्य प्रस्तुति समावेशिता के संदेश को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने का एक सशक्त माध्यम बनी।
ऑटिज्म जागरूकता के वैश्विक प्रतीक के रूप में जानी जाने वाली यह नीली रोशनी केवल एक प्रतीकात्मक संकेत नहीं थी, बल्कि इसने ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के लिए शुरुआती समझ, स्वीकृति और समान अवसरों के बारे में सार्थक चर्चा शुरू करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया। एक साथ कई क्षेत्रों को सक्रिय करके, टाटा पावर ने इस उद्देश्य की दृश्यता को भौगोलिक सीमाओं से परे मज़बूत किया।
इस गति को बनाए रखने के लिए, टाटा पावर ने ‘ऑटिज्म जागरूकता माह’ के हिस्से के रूप में पूरे अप्रैल के दौरान अपने विभिन्न स्थानों पर महीने भर चलने वाली गतिविधियों की योजना बनाई है। इन पहलों में कर्मचारी वॉलंटियरिंग, सामुदायिक आउटरीच, जागरूकता सत्र और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे न्यूरोडायवर्स व्यक्तियों और उनके देखभाल करने वालों (caregivers) के लिए सहायता तंत्र मज़बूत हो सके।
अपनी ‘पे ऑटेंशन’ पहल के माध्यम से, टाटा पावर एक समग्र और समावेशी सहायता ढांचा बनाने की दिशा में काम कर रहा है जो जागरूकता, पहुंच और देखभाल के अंतर को कम करता है। जमीनी प्रभाव को निरंतर संचार और जुड़ाव के साथ जोड़कर, कंपनी समावेशिता को बढ़ावा देने, सहानुभूति को प्रोत्साहित करने और एक अधिक न्यायसंगत समाज के निर्माण में योगदान दे रही है।
