घोड़े-बग्घी,शहनाई की मधुर धुन और डांडिया खेलती महिलाओं ने मोहा मन,रथ पर विराजमान आचार्यश्री की सुंदर प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
देवरीकलां-: जैन धर्म के महान संत,त्याग,तपस्या,संयम और अहिंसा के प्रतीक परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का अवतरण दिवस सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को श्रद्धा,भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर जैन समाज द्वारा भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें धर्म और संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली।चल समारोह में घोड़े-बग्घी,शहनाई की मधुर धुन और धार्मिक उत्साह से सराबोर श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र रहे। समारोह में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में डांडिया खेलते हुए चल रही थीं,जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने चल समारोह का स्वागत किया और आचार्यश्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।चल समारोह में सुसज्जित रथ पर विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की सुंदर प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में जैन समाज की एकजुटता,धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का जीवन त्याग,तपस्या,आत्मसंयम,जीवदया और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा।उनके विचार आज भी समाज को सदाचार,नैतिकता और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा देते हैं। जैन समाज में उनके अवतरण दिवस को संयम दिवस एवं गुरु उपकार महोत्सव के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है! उनका संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक साधना,स्वदेशी,शिक्षा,जीवों के प्रति करुणा और मानव सेवा के संदेश को समर्पित रहा। उनका जीवन समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
