सीहोर: यूनाइटेड किंगडम में आयोजित प्रतिष्ठित ‘रेस2स्पेस अंतरराष्ट्रीय प्रोपल्शन प्रतियोगिता 2026’ में वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की छात्र-नेतृत्व वाली रॉकेटरी टीम, टीम अग्निपक्षा ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड रॉकेट इंजन का अंतरराष्ट्रीय पेशेवर सुविधा केंद्र में दो बार सफल ‘हॉट-फायर परीक्षण’ कर टीम ने हाइब्रिड प्रोपल्शन श्रेणी में विश्व स्तर पर 8वीं रैंक हासिल की।
यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड द्वारा वेस्टकॉट स्पेस क्लस्टर (बकिंघमशायर) में आयोजित इस चौथे संस्करण में अमेरिका, फ्रांस, नीदरलैंड्स और दक्षिण कोरिया सहित 22 से अधिक देशों की 75 टीमों (लगभग 530 विद्यार्थी) ने हिस्सा लिया।
प्रोजेक्ट हाइप (HyPE) और तकनीकी यात्रा
टीम अग्निपक्षा का यह अभूतपूर्व प्रदर्शन उनके प्रोजेक्ट हाइप (HyPE) पर आधारित था:
- इंजन क्षमता: यह लगभग 7 किलो न्यूटन श्रेणी का हाइब्रिड रॉकेट इंजन है।
- अंतर-विषय योगदान: एयरोस्पेस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस के लगभग 40 छात्रों ने मिलकर इसे डिजाइन व निर्मित किया।
- तकनीकी छलांग: ठोस ईंधन आधारित मोटर (1,500 न्यूटन थ्रस्ट) से सीधे हाइब्रिड प्रोपल्शन की ओर यह टीम का 10-गुना बड़ा बदलाव है।
- परीक्षण मानक: इंजन को ब्रिटेन भेजने से पहले कोल्ड-फ्लो, प्रूफ-प्रेशर और फाइनाइट एलिमेंट एनालिसिस (FEA) जैसे कड़े मानकों से गुजारा गया।
प्रमुख घटकों और उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्योरा
| मापदंड / विवरण | मुख्य बिंदु |
| प्रतियोगिता व स्थल | रेस2स्पेस 2026, वेस्टकॉट वेंचर पार्क, यूके |
| वैश्विक रैंकिंग | हाइब्रिड प्रोपल्शन श्रेणी में 8वां स्थान (कुल 49 प्रतिस्पर्धी टीमें) |
| प्रमुख उपलब्धि | हाइब्रिड रॉकेट इंजन के 2 सफल हॉट-फायर परीक्षण |
| टीम संरचना | जुलाई 2025 में गठित, 40 विद्यार्थियों का बहुविषयक समूह |
विश्वविद्यालय व टीम नेतृत्व के विचार
- प्रो. सतीश कुमार मोढ़ (कुलपति, वीआईटी भोपाल): “यह सफलता छात्र-नेतृत्व वाले तकनीकी विकास और वैश्विक स्तर पर नवाचार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”
- डॉ. प्रशांत गोपालकृष्णन (फैकल्टी एडवाइजर): “डिजाइन को व्यावहारिक रखना, उपलब्ध समय में सत्यापन को प्राथमिकता देना और निर्माण क्षमता के प्रति ईमानदार दृष्टिकोण ही इस सफलता की कुंजी रहा।”
- श्रेयस हिरेगौदार (कप्तान, टीम अग्निपक्षा): “सीमित संसाधनों के बावजूद वैश्विक स्तर पर पेशेवर सुविधा में इंजन को दो बार सफलतापूर्वक फायर होते देखना हमारी कड़ी मेहनत को सार्थक बनाता है।”
