भुवनेश्वर/मुंबई: एसबीआई (SBI) रिसर्च द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, ओडिशा सरकार की ‘सुभद्रा योजना’ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुई है। इस योजना के प्रायोजक बैंक के रूप में एसबीआई ने लाभार्थियों के डेटा का विश्लेषण कर पाया कि नामांकन के बाद महिलाओं के औसत मासिक बैंक बैलेंस में 45% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना विशेष रूप से 30 से 44 वर्ष की कार्यशील आयु वर्ग की महिलाओं के बीच अत्यधिक प्रभावी रही है, जो कुल लाभार्थियों का लगभग 46% हिस्सा हैं। यह वित्तीय वृद्धि महिलाओं की आर्थिक स्थिरता और उनके परिवार के कल्याण को मज़बूत करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
बचत के अलावा, यह अध्ययन महिलाओं के खर्च करने के व्यवहार और डिजिटल अपनाने की आदतों में भी सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। रिपोर्ट बताती है कि सुभद्रा योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता से महिलाओं की क्रय शक्ति बढ़ी है। जहाँ युवा लाभार्थी (30 वर्ष से कम) अपनी विविध ज़रूरतों पर खर्च कर रही हैं, वहीं बड़ी उम्र की महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं और घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके अतिरिक्त, योजना ने डिजिटल वित्तीय समावेशन को भी गति दी है, जिसके परिणामस्वरूप रुपे (RuPay) कार्ड और डिजिटल भुगतान के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। संक्षेप में, सुभद्रा योजना न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में सार्थक बदलाव ला रही है।
