कुल्हड़ में गुड़ फोड़ने वाली कहावत चरितार्थ हुई…!!!
सूरज मेहता
उज्जैन में विगत दिनों जो बवाल मचा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है ? बताते हैं कि इतने गंभीर मामले में प्रशासन ने मीडिया से दूरी बनाकर बाले बाले मामले को निपटाने का प्रयास किया और यही भूल प्रशासन के गले की हड्डी साबित हो गई। अगर पूरे प्रकरण पर नजर डालें तो हमने प्रशासन को समाचार माध्यम से गंभीर हालत के बारे में पूर्ण रूप से समय पर सचेत कर दिया था सब कुछ जानने के बाद भी प्रशासन इस भ्रम में रहा कि वक़्त आने पर निपट लेंगे….. और कुल्हड़ में गुड फोड़ने वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया।
जब प्रशासन को सबसे ज्यादा जरूरत मीडिया की थी तभी प्रशासन ने मीडिया से दूरी बना ली , जबकि उज्जैन का मीडिया तो हमेशा निष्पक्ष और निर्विवाद रहता आया है। हालांकि प्रशासन ने यह चूक जानबूझकर नहीं की यह बात 100% सत्य भी है। मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच हुई अति महत्वपूर्ण बैठक की जानकारी मीडिया को उपलब्ध ही नहीं कराई गई जब मीडिया को पता ही नहीं बैठक में क्या समझौता और क्या तय हुआ है तो फिर तो गलतफहमियों और अफवाह को फैलने से कौन रोकता। अगर प्रशासन मीडिया की सलाह और मीडिया को सेतु के रूप में उपयोग करता तो स्थिति बिगड़ती नहीं। प्रशासन ने हमेशा मीडिया को हर जानकारी समय पर दी है लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ की मीडिया से गोपनीयता बना ली…? हर रणनीति सही होने के बाद प्रशासन की खबरनवीसों से संवादहीनता के चलते बिना वजह मामला बिगड़ गया।
