सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज की राह: एम्स भोपाल के डॉ. सोनी ने पूरी की एचटीए की अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप

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एम्स भोपाल के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बाबू लाल सोनी ने स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) की अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप सफलतापूर्वक पूरी की है। यह फेलोशिप आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन (एएमटीजेड), विशाखापत्तनम स्थित कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ टेक्नोलॉजी (केआईएचटी) में आयोजित हुई। एचटीए यह परखने की व्यवस्थित प्रक्रिया है कि कोई नई स्वास्थ्य तकनीक कितनी असरदार, सुरक्षित और किफायती है। इसका उद्देश्य सीमित संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।

एचटीए एक बहुविषयक क्षेत्र है, जिसमें स्वास्थ्य तकनीकों की नैदानिक प्रभावशीलता, सुरक्षा, लागत-प्रभावशीलता और समाज पर उनके व्यापक असर का मूल्यांकन किया जाता है। यह स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा और स्वास्थ्य नीतियों को जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े फैसलों को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने में मदद करता है।

फेलोशिप के महत्व पर डॉ. सोनी ने कहा कि भारत में एचटीए की अवधारणा तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि विकसित देशों में इसका उपयोग कई दशकों से हो रहा है। उन्होंने चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य नवाचार से जुड़े सभी विशेषज्ञों से एचटीए को समझने और अपने कार्यक्षेत्र में अपनाने का आह्वान किया। डॉ. सोनी ने कहा कि केवल नई तकनीक विकसित करना काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि वह तकनीक चिकित्सकीय रूप से असरदार, किफायती, सुलभ और टिकाऊ हो। खासकर सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों का समझदारी से उपयोग करने के लिए एचटीए बेहद अहम है। इससे स्वास्थ्य तकनीकों के सही चयन, मूल्यांकन और उपयोग को बढ़ावा मिलता है और सीमित संसाधनों में अधिकतम स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करना और स्वास्थ्य तकनीकों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना वर्ष 2047 तक विकसित भारत (विकसित भारत @ 2047) के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

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