नई दिल्ली : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) के पीजीडीएम-इंटरनेशनल बिजनेस प्रोग्राम द्वारा अपने वार्षिक मंच ‘हर्मीस डायलॉग 6.0’ का भव्य आयोजन किया गया। वैश्विक मुद्दों पर गंभीर विमर्श के लिए समर्पित इस प्रतियोगिता में संयुक्त अरब अमीरात, भारत, ब्राजील, रूस, अमेरिका और जापान सहित कुल 12 देशों का प्रतिनिधित्व किया गया। इस नेशनल लेवल कंपटीशन में देश भर के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों से 250 से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए, जिसमें आईआईएम रोहतक की टीम ‘लेब्रूम’ ने प्रथम स्थान हासिल कर विजेता का खिताब अपने नाम किया।
इस वर्ष के संवाद की थीम “क्या बढ़ती जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए देशों को ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए?” पर आधारित थी। प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में आईआईटी पटना, आईआईएम उदयपुर, एसआरसीसी और फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट जैसे संस्थानों के छात्र शामिल हुए। ज्यूरी पैनल में भारत सरकार के पूर्व कॉमर्स सेक्रेटरी राजीव खेर और सीआईआई के चीफ एडवाइजर सुमंत चौधुरी (दोनों सेवानिवृत्त आईएएस) ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति और नीति निर्धारण के मानकों पर किया।
विशेषज्ञों ने चर्चा के दौरान ऊर्जा को केवल एक आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक हथियार बताया। राजीव खेर ने विषय की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक वार्ताओं के संदर्भ में यह मुद्दा हर बीतते घंटे के साथ महत्वपूर्ण होता जा रहा है। बिमटेक की डायरेक्टर डॉ. प्रबीना राजिब ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी अब केवल सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी प्रगति और महत्वपूर्ण खनिजों (Minerals) पर बढ़ती निर्भरता जैसे जटिल पहलू भी जुड़ चुके हैं।
प्रतियोगिता का समापन ₹60,000 के कुल पुरस्कार वितरण के साथ हुआ, जिसमें फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट दूसरे और एसआरसीसी तीसरे स्थान पर रहे। यह आयोजन तीन चरणों में संपन्न हुआ—ज्ञान आधारित परीक्षण, केस स्टडी प्रस्तुति और अंत में ‘बैटल ऑफ पर्सपेक्टिव्स’, जिसने छात्रों को संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाली चर्चाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया। इस पहल के माध्यम से बिमटेक ने भविष्य के ऐसे लीडर्स तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो वैश्विक दृष्टिकोण और गंभीर चिंतन की क्षमता रखते हों।
