देवरीकलां-:पुराना बाईपास स्थित अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष कैलाश पटेल के निवास पर एक दिवसीय सत्संग एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परमहंस आश्रम अमृतझिरिया से संत श्री 1008 मुक्तानंद जी महाराज का पदार्पण हुआ। कैलाश पटेल एवं उनके परिजनों ने संत श्री का आरती उतारकर पूजन एवं स्वागत किया।
सत्संग के दौरान संत श्री मुक्तानंद जी महाराज ने निर्वाणी मुद्रा और सारनाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति अपनी जीभ को दांतों की जड़ में लगा दे तो केवल ‘ओम’ नाम का उच्चारण होता है, अन्य कोई नाम मुंह से नहीं निकलता। इसलिए सारनाम और सत्यनाम ओम ही है। उन्होंने कहा कि मन को बदलने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उसे समझने की जरूरत है। जिस दिन व्यक्ति अपने विचारों का साक्षी बन जाता है, उसी दिन उसके भीतर की शांति का द्वार खुल जाता है।
दिव्यांग कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां
सत्संग के बाद राष्ट्रीय स्तर के कलाकार डॉ. उमेश वैद्य और उनके दिव्यांग साथियों ने पारंपरिक मोनिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कलाकारों ने दिवारी गायन और नृत्य के माध्यम से दर्शकों को आनंदित किया। मोनिया नृत्य के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का नाट्य रूपांतरण भी प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति में कालिया नाग की सजीव झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के मर्दन और उसके फनों पर नृत्य करने की लीला का प्रभावी मंचन किया। इसके बाद गीता उपदेश की प्रस्तुति के साथ मोनिया नृत्य का समापन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।
दिव्यांग कलाकारों को साथ लेकर तैयार की टीम
डॉ. उमेश वैद्य ने बताया कि मोनिया नृत्य दल में शामिल सभी साथी कलाकार दिव्यांग हैं। किसी कलाकार की आंखों की रोशनी नहीं है तो किसी के हाथ नहीं हैं, वहीं कोई कद से छोटा है। इसके बावजूद सभी को साथ लेकर उन्होंने ऐसी टीम तैयार की है, जो विभिन्न स्थानों पर मोनिया नृत्य की प्रस्तुतियां देकर बुंदेलखंड की प्राचीन लोक परंपरा को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री हर्ष यादव, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि महेंद्र खल्ला, सीताराम आठ्या, नीरज पटेल, सीताराम सेन, नेतराज सिंह राजपूत, मेघराज सिंह राजपूत, उमराम यादव, लक्ष्मण लोधी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
