वेदांता एल्युमीनियम अब दो-तिहाई मेटल को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के रूप में बेचती है

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  • सितंबर तिमाही में वेदांता एल्युमीनियम के कुल प्रोडक्शन में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 67 फीसदी रही, जो एक साल पहले लगभग 53 फीसदी थी। हालांकि रिकॉर्ड प्रोडक्शन सुर्खियों में रहा है, लेकिन ज़्यादा अहम बदलाव वह है जो कंपनी हर टन प्रोडक्शन से हासिल कर रही है।

मुंबई: वेदांता एल्युमीनियम मैटल लिमिटेड (एनएसईः वीएएमएलः बीएसईः 544780) मजबूत ऑपरेटिंग और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के साथ वित्तीय वर्ष 27 की दूसरी छमाही में कदम रख रही है। कंपनी ने जुलाई से सितंबर की तिमाही में अब तक का सबसे अधिक एल्युमीनियम का रिकॉर्ड 649 किलो टन उत्पादन किया। साल की पहली छमाही का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जो 1,281 किलो टन था। सितंबर तिमाही के कुल उत्पादन में से 432 किलो टन उत्पादन वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के रूप में प्लांट से निकला; यह कुल उत्पादन का लगभग 67 फीसदी (यानी हर तीन टन में से दो टन) है। कंपनी का लक्ष्य अपने एल्युमीनियम की बिक्री में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी को लगभग 90 फीसदी तक बढ़ाना है।

साल के दौरान वैल्यू-एडेड उत्पादन में 1,03,000 टन की बढ़ोतरी हुई, जो कुल एल्युमीनियम उत्पादन में हुई 32,000 टन की बढ़ोतरी से तीन गुना से भी अधिक है। कंपनी अपने द्वारा उत्पादित हर टन एल्युमीनियम का एक बड़ा हिस्सा उच्च मूल्य वाले रूपों में बदल रही है।

वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में, कंपनी ने रु6,597 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया और प्रति शेयर रु8 का डिविडेंड घोषित किया, जो इसकी मजबूत कमाई और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की कीमत आमतौर पर इनगॉट्स से अधिक होती है, क्योंकि इन्हें खास ग्राहकों और ऐप्लीकेशन की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का हिस्सा ज़्यादा होने से कमाई और मार्जिन बेहतर होता है, भले ही एल्युमीनियम की मूल कीमत में कोई बदलाव न हो। मेटल की ज़्यादा कीमतें और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स से कंपनी को अतिरिक्त कमाई के अवसर मिलते हैं। वेदांता एल्युमीनियम की रेंज में वायर रॉड्स, बिलेट्स, प्राइमरी फाउंड्री अलॉय और रोल्ड प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल और दूसरे डाउनस्ट्रीम उद्योगों में खास तरह के एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। अपनी दूसरी तिमाही की प्रोडक्शन रिपोर्ट में, वेदांता एल्युमीनियम ने बताया कि कंपनी ने पिछली दो तिमाहियों में अपनी वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन क्षमता को मज़बूत किया है। ऐसा एशियाई ऑटोमोटिव सेक्टर से बढ़ती मांग और भारत में डाउनस्ट्रीम मांग को देखते हुए किया गया है। ऑटोमोटिव सेक्टर की मांग कंपनी की प्रोडक्ट पाइपलाइन को भी आकार दे रही है। कंपनी ने हाल ही में अपनी प्राइमरी फाउंड्री अलॉय रेंज के तहत दो एडवांस्ड अलॉय लॉन्च किए हैंः कॉपर-डोप्ड अलॉय और वेदांता फाउंड्री अलॉय (जिसे आईआईटी दिल्ली के सहयोग से बनाया गया है)। ये दोनों अलॉय पारंपरिक और इलेक्ट्रिक कारों और कम ईंधन की खपत वाली गाड़ियों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं।

यह बदलाव कंपनी को मेटल की मांग के सबसे तेज़ी से बढ़ते स्रोतों में से एक के करीब भी लाता है। एआई डेटा सेंटर्स में चलता है, और हर नई युनिट के लिए पावर केबल्स, कूलिंग इक्विपमेंट, रैक्स और एनक्लोजर्स की ज़रूरत होती है। इन सभी में एल्युमीनियम का इस्तेमाल होता है क्योंकि यह उष्मा और बिजली का अच्छा संवाहक है, इसमें जंग नहीं लगता, इसे बार-बार रीसायकल किया जा सकता है, यह हल्का होता है और कॉपर से सस्ता भी होता है। पावर लाइन्स और ग्रिड अपग्रेड्स में इस मैटल की ज़्यादा ज़रूरत होती है। ओवरहेड लाइन्स ज़्यादातर एल्युमीनियम कंडक्टर्स से बनी होती हैं, जो वायर रॉड के रूप में शुरू होती हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2025 में लगभग 1.2-2.2 गीगावॉट थी जो 2030 में बढ़कर 4-12 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी। इस विस्तार के लिए ज़्यादातर केबल, कंडक्टर और अन्य संरचनाएं स्थानीय स्तर पर खरीदी जाएंगी, जिसका फायदा घरेलू उत्पादक को मिलेगा।

प्रोडक्ट मिक्स में यह बदलाव वेदांता एल्युमीनियम की मूल प्रोडक्शन क्षमता के विस्तार के साथ-साथ हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में बालको का एल्युमीनियम उत्पादन सालाना 19 फीसदी बढ़कर 178 किलो टन हो गया। इस तिमाही के दौरान, बालको ने अपनी खास 525 किलोएम्पीय स्मेल्टर पॉटलाइन के दूसरे चरण को भी चालू किया, जिससे इसकी संचालन क्षमता, 435 किलो टन के नियोजित विस्तार का 50 फीसदी हो गई।

सीएसएलए ने 4 अक्टूबर को इस शेयर के लिए आउटपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी और 12 महीने का टारगेट प्राइस रु540 तय किया। यह शेयर की मौजूदा कीमत से लगभग 34 फीसदी ज़्यादा है। जियोजित ने सितंबर में इस शेयर को ‘बाय’ रेटिंग दी और 12 महीने का टारगेट रु498 रखा। इसके पीछे कई वजहें बताई गईं, जैसे रिकॉर्ड वैल्यू-एडेड आउटपुट, बालको में संचालन का विस्तार और कंपनी के अपने एल्यूमिना का ज़्यादा इस्तेमाल। साथ ही, यह भी बताया गया कि प्रबन्धन भारत में ज़्यादा वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स बेचने की योजना बना रहा है।   

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