बिमटेक और स्विस री इंडिया के बीच एमओयू: इंश्योरेंस सेक्टर के लिए तैयार होंगे ‘फ्यूचर-रेडी’ प्रोफेशनल्स; रीइंश्योरेंस और डेटा साइंस पर रहेगा फोकस

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नोएडा : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) और वैश्विक रीइंश्योरेंस दिग्गज स्विस री इंडिया ने बीमा क्षेत्र में नवाचार और उच्च स्तरीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पीजीडीएम-इंश्योरेंस बिजनेस मैनेजमेंट (PGDM-IBM) के छात्रों के लिए उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम विकसित करना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक पूल बनाना है। इस सहयोग के तहत विशेष रीइंश्योरेंस कोर्सेज और एग्जीक्यूटिव मेंटरिंग प्रोग्राम्स का सह-विकास किया जाएगा।

इस एमओयू के माध्यम से स्विस री इंडिया, बिमटेक के छात्रों को न केवल फाइनल और समर प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें शॉर्ट-टर्म इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स में सीधे भागीदारी का मौका भी मिलेगा। दोनों संस्थान मिलकर रीइंश्योरेंस, रिस्क एनालिटिक्स, डेटा साइंस, इंश्योरेंस पेनिट्रेशन, क्लाइमेट रिस्क और इंश्योरटेक जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष मॉड्यूल तैयार करेंगे। इसके अलावा, स्विस री के विशेषज्ञों द्वारा नियमित ट्रेनिंग सेशंस, वेबिनार और वर्कशॉप्स आयोजित की जाएंगी, जिससे छात्रों को वैश्विक मार्केट ट्रेंड्स की गहरी समझ मिल सके।

साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए स्विस री इंडिया के एमडी एवं हेड अमित कालरा ने छात्रों को निरंतर सीखने (Learn, Unlearn and Relearn) के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बिमटेक के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि यह सहयोग समय के साथ और अधिक सशक्त हुआ है। वहीं, बिमटेक की डायरेक्टर डॉ. प्रबीना राजिब ने कहा कि भारत का इंश्योरेंस सेक्टर अपार संभावनाओं से भरा है और यह साझेदारी एक मजबूत ‘अकादमिक-इंडस्ट्री इंटरफेस’ तैयार करेगी, जिससे छात्रों को मेंटरशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स के जरिए व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा।

इस एमओयू का एक प्रमुख लक्ष्य ‘टी-शेप्ड’ (T-shaped) प्रोफेशनल्स तैयार करना है, जिनके पास अपने विषय की गहराई के साथ-साथ उद्योग की व्यापक समझ भी हो। यह सहयोग रिसर्च और आउटरीच पहलों के माध्यम से बीमा क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर देगा। नोएडा कैंपस में आयोजित एक विशेष इंडस्ट्री इंटरैक्शन सेशन के दौरान दोनों संस्थानों के वरिष्ठ नेतृत्व, संकाय सदस्यों और छात्रों की उपस्थिति में इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया।

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