मुंबई : इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक शुरुआत करते हुए, क्यूब हाईवेज ट्रस्ट (Cube Highways Trust) ने अपने सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है। यह भारत का पहला ऐसा मामला होगा जहाँ एक प्राइवेट लिस्टेड InvIT पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के जरिए पब्लिक InvIT में तब्दील होगा।
IPO और वैल्यूएशन की मुख्य बातें:
- निर्गम का आकार: यह इश्यू ₹5,000 करोड़ (₹50,000 मिलियन) तक का है, जो पूरी तरह से मौजूदा यूनिटधारकों द्वारा बिक्री के लिए पेश किया गया है।
- एसेट वैल्यू: 30 सितंबर 2025 तक ट्रस्ट का एंटरप्राइज वैल्यू/एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹36,519.91 करोड़ आंका गया है।
- रेटिंग: इस इनविट को क्रिसिल, इंडिया रेटिंग्स और आईसीआरए से AAA की उच्चतम क्रेडिट रेटिंग प्राप्त है, जो इसकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।
पोर्टफोलियो और प्रदर्शन:
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट का पोर्टफोलियो देश के 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैला हुआ है:
- मौजूदा परिसंपत्तियां: वर्तमान में ट्रस्ट 27 सड़क संपत्तियों का संचालन करता है (18 टोल रोड, 6 हाइब्रिड एन्युटी और 3 एन्युटी एसेट्स)।
- विस्तार: IPO पूरा होने से पहले, ट्रस्ट 4 और हाईवे व टनल प्रोजेक्ट्स का अधिग्रहण करेगा, जिससे पोर्टफोलियो 31 सड़क परिसंपत्तियों (9,811 लेन किमी) का हो जाएगा।
- शानदार रिटर्न: अप्रैल 2023 में अपनी प्राइवेट लिस्टिंग के बाद से ट्रस्ट की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में 43% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है।
सार्वजनिक लिस्टिंग का उद्देश्य:
प्राइवेट से पब्लिक InvIT में रूपांतरण का मुख्य लक्ष्य निवेशक आधार को व्यापक बनाना है। इससे म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए निवेश के रास्ते खुलेंगे, जो पहले तरलता (Liquidity) की कमी के कारण सीमित थे। साथ ही, यह हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) और फैमिली ऑफिसेज के लिए एक आकर्षक और स्थिर नकद प्रवाह वाला निवेश विकल्प बनेगा।
प्रमुख हिस्सेदार और प्रबंधन:
ट्रस्ट के प्रमुख यूनिटधारकों में मुबाडाला, लार्सन एंड टुब्रो, एसबीआई, कोटक महिंद्रा और बीसीआई (BCI) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इस ऑफर के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और जेएम फाइनेंशियल बुक-रनिंग लीड मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं।
विशेष: सेबी के नियमों में हालिया संशोधनों के कारण, गैर-प्रायोजक यूनिटधारकों के लिए कोई अतिरिक्त लॉक-इन अवधि लागू नहीं होगी, जिससे बाजार में तरलता बनी रहेगी।
