85% खनन ब्लॉक अब भी बंद, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उठाए सवाल; आयात कम करने के लिए दी ‘तीन सूत्रीय’ सलाह

Spread the love

वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश के खनन (Mining) क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में नीलाम किए गए कुल 592 खनन ब्लॉक्स में से केवल 82 (लगभग 15%) ही वर्तमान में उत्पादन कर रहे हैं, जबकि 85% ब्लॉक्स अब भी परिचालन से बाहर हैं।

अग्रवाल के अनुसार, यह स्थिति न केवल भारत की खनिज सुरक्षा को प्रभावित कर रही है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डाल रही है।


आयात बिल और रोजगार का संकट

अनिल अग्रवाल ने भारत के विशाल आयात बिल (Import Bill) की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य रखे:

  • $400 अरब का आयात: भारत का कुल आयात बिल लगभग 400 अरब डॉलर है।
  • 50% हिस्सा संसाधनों पर: इस बिल का आधा हिस्सा केवल प्राकृतिक संसाधनों के आयात पर खर्च होता है।
  • नौकरियों का नुकसान: घरेलू खनन ठप होने से नौकरियां भारत के बजाय उन देशों में पैदा हो रही हैं जिनसे हम संसाधन खरीद रहे हैं।

देरी के तीन मुख्य कारण

चेयरमैन ने उन बाधाओं को भी रेखांकित किया जो खदानों को शुरू होने से रोक रही हैं:

  1. भूमि अधिग्रहण: जमीन मिलने में आने वाली जटिलताएं।
  2. मंजूरी में देरी: पर्यावरण और वन विभाग से क्लीयरेंस मिलने में लगने वाला लंबा समय।
  3. अत्यधिक प्रीमियम: नीलामी के दौरान कुछ खदानों पर इतना ऊंचा प्रीमियम लग गया है कि उन्हें चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

सुधार के लिए अग्रवाल के सुझाव

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए उन्होंने सरकार को तीन प्रमुख समाधान सुझाए हैं:

  • सीधा भुगतान: भूमि अधिग्रहण के लिए तकनीक-आधारित डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम लागू किया जाए।
  • सरल प्रक्रिया: पर्यावरण और अन्य मंजूरी प्रक्रियाओं को और अधिक सुव्यवस्थित और तेज बनाया जाए।
  • प्रीमियम की सीमा: खनन को लाभकारी बनाने के लिए प्रीमियम की अधिकतम सीमा 60% तय की जानी चाहिए।

भविष्य की संभावना: ग्लोबल हब बनने का मौका

अनिल अग्रवाल का मानना है कि भारत के पास खनिज, धातु और हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि यदि इन बाधाओं को दूर कर लिया जाए, तो यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा, जिससे विशेष रूप से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने सरकार के प्रयासों पर भरोसा जताते हुए ‘टीम इंडिया’ भावना के साथ काम करने का आह्वान किया ताकि आत्मनिर्भर भारत का सपना सच हो सके।

admin1

admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *